February 16, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

अपराधियों के हौसले बुलंद: दिनदहाड़े पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला

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अपराधियों के हौसले बुलंद: दिनदहाड़े पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला

बालोद जिले के गुरूर में पत्रकारिता जगत में हाल ही में घटित एक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। मीडियाकर्मी विनोद नेताम पर हुए जानलेवा हमले ने पूरे प्रदेश में पत्रकारों और समाज के अन्य वर्गों के बीच गुस्से और आक्रोश को जन्म दिया है। घटना 30 जुलाई की है, जब ग्राम परसुली निवासी और आदिवासी पत्रकार विनोद नेताम पर गुरूर मुख्यालय में दिनदहाड़े प्राणघातक हमला किया गया। इस हमले में विनोद नेताम गंभीर रूप से घायल हो गए, और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हमले की घटना

विनोद नेताम मंगलवार को अपने साथी अमित मंडावी के साथ गुरूर में मिष्ठान भंडार में नाश्ता कर रहे थे। उसी समय सुमित राजपूत और तुलेश सिन्हा ने जबरदस्ती उन्हें अपनी कार में बिठाया और पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा के कार्यालय में ले गए। यहां पर पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा सहित अन्य लोगों ने विनोद नेताम के साथ मारपीट की और गाली-गलौज करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। यह घटना यहीं नहीं रुकी; आरोपियों ने उनके घर पर भी जाकर उनकी पत्नी और बच्चों के साथ भी अभद्रता की।

गुरूर थाना प्रभारी का दुर्व्यवहार

इस घटना ने तब और तूल पकड़ लिया जब घायल अवस्था में विनोद नेताम और अन्य पत्रकार साथी गुरूर थाने में एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे। थाने में गुरूर थाना प्रभारी टीएस पट्टावी ने पीड़ित पत्रकार के साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार किया, बल्कि घटना की रिपोर्ट दर्ज करने में भी आनाकानी की। स्थिति तब बदली जब उच्चाधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और टीआई को फटकार लगाई, जिसके बाद अंततः एफआईआर दर्ज की गई।

अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज

बड़ी मशक्कत के बाद, गुरूर थाने में पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा और उनके साथियों सुमित राजपूत, साजन पटेल, ओंकार महल्ला, तुलेश सिन्हा सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ धारा 191 (2), 296, 115 (2), 351 (2) (3), 140 (3) के तहत अपराध दर्ज किया गया। एसडीओपी राजेश बागड़े ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पत्रकार जगत में आक्रोश

इस हमले से पूरे प्रदेश के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। पत्रकारों का कहना है कि जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पत्रकारों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही उन्होंने पीड़ित पत्रकार के समुचित इलाज के लिए सरकारी खर्च पर उपचार और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की है।

गुरूर थाना प्रभारी का विवादित इतिहास

गुरूर थाना प्रभारी टीएस पट्टावी का नाम पहले भी विवादों में रहा है। पत्रकारों के साथ उनके दुर्व्यवहार के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। जहां-जहां उनकी नियुक्ति हुई है, वहां अपराधियों का मनोबल बढ़ता देखा गया है। वे अपराधियों को संरक्षण देने के लिए भी बदनाम रहे हैं। पत्रकारों का आरोप है कि टीएस पट्टावी उन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते जो उनके प्रिय होते हैं, और अपने क्षेत्र में अपराध की घटनाओं को कम दिखाने के लिए रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करते हैं।

राजहरा में उनके कार्यकाल के दौरान भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। एक वरिष्ठ पत्रकार के घर में चोरी की घटना के बावजूद, पट्टावी ने न सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार किया था, बल्कि उस पत्रकार को गाली देकर थाने से बाहर निकाल दिया था। इस प्रकार की घटनाएं पत्रकारों और आम जनता के प्रति उनके रवैये पर सवाल खड़ा करती हैं।

पत्रकारों की मांग

इस घटना ने पत्रकारों और समाज के अन्य हिस्सों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा और कब तक पुलिस महकमे के कुछ अधिकारी इस तरह से आम जनता के साथ दुर्व्यवहार करते रहेंगे? पत्रकारों की मांग है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करते और अपराधियों को संरक्षण प्रदान करते हैं।

गुरूर में हुए इस हमले के बाद, पत्रकारों का एकजुट होकर विरोध जताना इस बात का संकेत है कि अब इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना से पत्रकारिता जगत में सुरक्षा के सवाल खड़े हो गए हैं, और यह आवश्यक हो गया है कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाए ताकि पत्रकार स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से अपना कार्य कर सकें।

*पत्रकारों ने उठाया सवाल*

विनोद नेताम पर हुए हमले ने प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यह घटना दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक संरक्षण में अपराधी बेखौफ होकर अपराध कर रहे हैं, और पुलिस महकमे के कुछ अधिकारी उन अपराधियों का समर्थन कर रहे हैं। इस स्थिति में पत्रकारों का संगठित होकर विरोध जताना एक सकारात्मक कदम है, जिससे इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके और समाज में न्याय और सुरक्षा की भावना को बनाए रखा जा सके। अब देखना यह है कि प्रशासन इस घटना पर क्या कदम उठाता है और दोषियों को सजा दिलाने में कितना सक्षम साबित होता है।

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