जिंदल कोल माइंस धौराभाठा जनसुनवाई अवैध घोषित करने की मांग: सीपीएम व संयुक्त किसान मोर्चा ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

जिंदल कोल माइंस धौराभाठा जनसुनवाई अवैध घोषित करने की मांग: सीपीएम व संयुक्त किसान मोर्चा ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापनभारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जिला इकाई रायगढ़ और संयुक्त किसान मोर्चा रायगढ़ द्वारा कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में आयोजित जिंदल पावर लिमिटेड की कोल माइंस जनसुनवाई को पूरी तरह अवैध, अपारदर्शी एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया गया है तथा इसे तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित कर निरस्त करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि धौराभाठा क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र पंचम अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां पेसा कानून लागू है। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामसभा की अनुमति, पारदर्शिता और जनभागीदारी सर्वोच्च संवैधानिक शर्तें हैं। लेकिन जनसुनवाई के आयोजन में इन सभी नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। निर्धारित स्थान से दूर, असंगत और नियंत्रित माहौल में जनसुनवाई आयोजित कर उसे महज एक औपचारिकता बना दिया गया।
किसान संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन एवं कंपनी प्रतिनिधियों ने जनता की आवाज दबाने, आपत्तियों को दर्ज न होने देने तथा आदिवासी किसानों-मजदूरों को जनसुनवाई स्थल तक पहुँचने से रोकने जैसे गंभीर गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक कदम उठाए। यह कृत्य न केवल पेसा कानून का उल्लंघन है बल्कि क्षेत्र की आदिवासी जनता के साथ विश्वासघात भी है।
सीपीएम और संयुक्त किसान मोर्चा ने इस घटना को गंभीर संवैधानिक विसंगति बताते हुए कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की राय लेना है न कि एकतरफा निर्णय थोपना। उन्होंने मांग की कि धौराभाठा जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए तथा इस पूरी प्रक्रिया में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर और पारदर्शी कदम उठाए जाएँ।
