June 13, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेंत्र में हाथियों का आतंक

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धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती संख्या ग्रामीण इलाकों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। वर्तमान समय में, इस क्षेत्र में कुल 103 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो मकान, फसल, और अन्य सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

हाथियों की स्थिति और मूवमेंट

  • कुल संख्या: धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में वर्तमान में 103 हाथियों की मौजूदगी है।
  • तमनार से लैलूंगा: तमनार इलाके से लैलूंगा क्षेत्र में 21 हाथियों का एक झुंड मूवमेंट कर रहा है। लैलूंगा इलाके में पहले से ही 22 हाथियों का एक बड़ा दल मौजूद है।
  • छाल रेंज: छाल रेंज में एक अकेला हाथी स्कूल परिसर के गेट, दीवार, एक मंदिर और फसल को नुकसान पहुंचा चुका है।

प्रभावित इलाकों की स्थिति

हाथियों की बड़ी संख्या से मकान, फसल और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं और वन विभाग की ओर देख रहे हैं।

वन विभाग की कार्रवाइयां

  • सुरक्षा सुनिश्चित करना: वन विभाग हाथियों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य उपाय कर रहा है।
  • प्रभावी रणनीतियां: हाथियों के मूवमेंट को नियंत्रित करने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।

फसल और संपत्ति की क्षति

छाल वन परिक्षेत्र के औरानारा इलाके में अकेले विचरण कर रहे हाथी ने स्कूल परिसर के गेट, दीवार और एक मंदिर को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा, क्षेत्र में फसल को भी व्यापक क्षति हुई है, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की चिंताएं और अपेक्षाएं

ग्रामीण हाथियों की बढ़ती गतिविधियों से सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। वे वन विभाग से और अधिक प्रभावी उपायों की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे सुरक्षित और निश्चिंत महसूस कर सकें।

निष्कर्ष

धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती संख्या एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रही है। वन विभाग और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से ही इस समस्या का समाधान संभव है। हाथियों के मूवमेंट को नियंत्रित करने और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उनके फसल और संपत्ति को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

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