ओपी के अदम्य साहस ने नक्सलियों से घिरे इलाके मोखपाल को बनाया शिक्षा का हब

ओपी ने जान हथेली में रखकर नक्सल क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाया
ओपी के अदम्य साहस ने नक्सलियों से घिरे इलाके मोखपाल को बनाया शिक्षा का हब
रायगढ़:- शहर वासी इस बात से अनजान है कि रायगढ़ जिले के माटी पुत्र ओपी ने जान हथेली में रखकर नक्सलियों से घिरे इलाके मोखपाल को शिक्षा के हब के रूप में विकसित किया था। नक्सली क्षेत्र में जाने से अधिकारी डरते है लेकिन ओपी चौधरी ने अपने कार्य क्षेत्र के लिए नक्सल क्षेत्र दंतेवाड़ा का चयन कर तात्कालिक मुख्यमंत्री रमन सिंह को चौकाया । रमन सिंह ने ओपी को एक बार इस फैसले पर पुनर्विचार करने कहा लेकिन अपने फैसलों पर अडिग रहना ओपी के जीवन में शामिल है।अपने अदम्य साहस के जरिए उन्होंने जीवन के हर लक्ष्य को हासिल किया। उनका मानना है सोते हुए सपने देखने से बेहतर सपने ऐसे हो जो आपको सोने नही दे। दंतेवाड़ा का चयन कर नक्सली से घिरे रहने वाले मोखपाल को शिक्षा के रूप में विकसित किया। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा नक्सलियों द्वारा जान से मारने की धमकी की वजह से वे रात भर जागते थे क्योंकि रात को अक्सर नक्सली हमले होते है। कमरे के अंदर सुरक्षा के नजरिए से एक आपातकालीन बंकर भी बनाया गया था। वे अक्सर अपनी वाहन बदल बदल कर चलते थे। नक्सली नही चाहते थे कि स्थानीय लोग शिक्षित हो नक्सलियों से विचारधारा की लड़ाई लड़ने वाले ओपी ने बहुत सी बाधाओ को पार करते हुए आदिवासियों के बच्चो के भविष्य के लिए बड़ा कार्य किया।स्थानीय लोग नक्सली धमकी की वजह से स्कूल नही जाते थे ओपी ने गांव के लोगो को समझाइश दी जीवन में शिक्षा के महत्व को समझाया। धीरे धीरे स्थानीय ग्रामीणों का ओपी ने भरोसा जीता उनके विचारों से प्रभावित होकर मोखपाल जैसे घोर नक्सली क्षेत्र में स्थानीय ग्रामीण स्कूल जाने के लिए तैयार हुए। इनकी लड़ाई शिक्षा और अशिक्षा के मध्य रही ज्ञान ओर अज्ञान की इस लड़ाई के रायगढ़ का माटी पुत्र अंततः जीत गया। नक्सलियों के हाथो में बंदूक थी और ओपी के हाथो शिक्षा की पुस्तके ।बिना हथियारों का उपयोग किया ओपी ने नक्सलियों के घर में ही जंग जीत ली।
