अधिवक्ता संघ की मांगों पर अब तक अमल नहीं अधिवक्ताओ में आक्रोश कहीं पुनः धरने पर बैठ न जाए

अधिवक्ता संघ की मांगों पर अब तक अमल नहीं
प्रशासन की लापरवाही से कहीं फिर न भड़क जाए अधिवक्ताओं का आंदोलन !
रायगढ़। अधिवक्ता संघ रायगढ़ के 72 दिनों तक चले ऐतिहासिक आंदोलन की सशर्त समाप्ति को अब पूरे 4 महीने बीतने वाले हैं लेकिन अब तक अधिवक्ता संघ की एक भी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
विदित हो कि रायगढ़ के तहसील कार्यालय में बीते 11 फरवरी 2022 को राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से हुई मारपीट की घटना के बाद कुछ अधिवक्ताओं पर एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इसके विरोध में न केवल रायगढ़ अधिवक्ता संघ बल्कि पूरे प्रदेश के अधिवक्ता संघ एकजुट हो गए थे। इसमें राज्य अधिवक्ता संघ को बार काउंसिल ऑफ इंडिया का भी समर्थन प्राप्त हुआ था। 11 फरवरी को रायगढ़ से शुरू हुआ आंदोलन प्रदेश व्यापी आंदोलन का रूप ले लिया था। अधिवक्ता संघों की ओर से माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट भी फाइल की गई थी और जिला मुख्यालयों के साथ हाई कोर्ट कैंपस में भी भ्रष्टाचार का पुतला दहन किया गया था जो कि हाई कोर्ट के इतिहास की पहली घटना बनी थी।
साथ ही राजधानी रायपुर में भी प्रदेश भर के अधिवक्ताओं ने हुँकार भरते हुए वहां भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध रैली निकाली और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की माँग की थी। वहां से लौटकर रायगढ़ अधिवक्ता संघ ने भूख हड़ताल शुरू किया जो कई दिनों तक चला। फिर 23 अप्रैल 2022 को रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक एवं जिला प्रशासन की ओर से एडिशनल कलेक्टर ए.आर. कुरुवंशी ने जिला न्यायालय रायगढ़ के सामने चल रहे भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचकर वहां हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं को जूस पिलाकर हड़ताल समाप्त करवाया था।
ज्ञातव्य है कि अधिवक्ता संघ की ओर से अपनी 10 सूत्रीय मांगों सहित रायगढ़ जिले से संबंधित दो प्रमुख मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा गया था। आइए इन मांगों पर नजर डालते हैं:-
अब तक कुर्सी पर जमे हुए हैं सिद्धार्थ अनंत
रायगढ़ जिले के संबंध में अधिवक्ता संघ की पहली प्रमुख मांग थी कि गृह जिले में पदस्थ राजस्व अधिकारियों को अन्य जिलों में स्थानांतरित किया जाए। आमतौर पर राजस्व अधिकारियों की पोस्टिंग गृह जिले में नहीं की जाती लेकिन रायगढ़ जिले के तहसीलों में तहसीलदार की मलाईदार कुर्सियों पर काबिज होने की प्रबल चेष्टा ने सरकारी नियम कायदों को ताक पर लगा दिया था। राज्य शासन ने अपने गृह जिले रायगढ़ में पदस्थ ऐसे तीन तहसीलदारों का अन्य जिलों में तबादला कर दिया, जिनमें से तहसीलदार सुनील अग्रवाल और अनुराधा पटेल को तो स्थानांतरित जिले के लिए तत्काल भारमुक्त कर दिया गया लेकिन घरघोड़ा तहसीलदार सिद्धार्थ अनंत अब तक अपनी कुर्सी पर जमे हुए हैं। बता दें कि घरघोड़ा तहसीलदार अनंत का तबादला कांकेर किया गया था इसके बाद अनंत ने अपनी स्वास्थ्यगत समस्याओं का हवाला देते हुए अपने गृह जिले रायगढ़ के नजदीक वाले किसी जिले में स्थानांतरण का निवेदन किया। इसके पश्चात माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर राज्य शासन ने 20 जून 2022 को संशोधित आदेश जारी कर सिद्धार्थ अनंत को जांजगीर-चांपा जिले में स्थानांतरण का आदेश दिया। लेकिन दो महीने बाद भी अब तक सिद्धार्थ अनंत यथावत घरघोड़ा तहसीलदार की कुर्सी पर जमे हुए हैं।
15-20 वर्षों से एक ही तहसील में जमे हुए हैं कई रीडर
अधिवक्ता संघ की दूसरी मांग थी कि 3 साल से अधिक समय से एक ही तहसील में पदस्थ रीडर्स और लिपिकों का टेबल ट्रांसफर किया जाए। इस मांग पर केवल रायगढ़ तहसील में आंशिक रूप से कार्रवाई की गई परंतु जिले के अन्य तहसीलों में हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं, रीडरों का टेबल ट्रांसफर अब तक नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले की कई तहसील तो ऐसे हैं जहां के लिपिक पिछले 15-20 वर्षों से एक ही जगह पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं।
क्या थीं अधिवक्ता संघ की 10 सूत्रीय माँगें
1.जिला अधिवक्ता संघ के सदस्यों के ऊपर झूठी एफआईआर को तत्काल वापस लिया जाए।
👉 नहीं लिया गया।
- राजस्व अधिकारियों से केवल प्रशासनिक कार्य कराया जाए।
👉 व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ।
3.राजस्व अधिकारियों से उनके न्यायिक कार्यों को वापस लेकर जिला न्यायालय के क्षेत्राधिकार में लाया जावे।
👉 प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई।
4.प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जावे।
👉 विधानसभा में अब तक बिल नहीं लाया गया।
5.सभी राजस्व अधिकारी कर्मचारियों और पटवारियों के ऑफिस और चेंबर में सीसीटीवी कैमरा लगवाया जावे जिसकी मॉनिटरिंग स्वयं कलेक्टर करें और 24 घंटे में फुटेज सार्वजनिक करें।
👉 इसके लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।
6.सभी राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक शिकायतों में तत्काल प्रथम सूचना पत्र दाखिल किया जावे।
👉 नहीं किया गया।
7.प्रत्येक जिला कार्यालय में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के थानों की स्थापना की जावे।
👉 कहीं भी स्थापना नहीं हुई।
8.लोक सेवा केंद्रों को समाप्त किया जाए।
👉 नहीं किया गया।
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9.एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने तक किसी भी अधिवक्ता के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने के पहले अधिवक्ता संघ की सहमति ली जावे।
👉 ऐसी घटना अब तक नहीं हुई है।
- सभी राजस्व अधिकारी कर्मचारियों से उनकी संपत्ति की घोषणा कराई जावे।
👉 किसी भी अधिकारी कर्मचारी ने घोषणा सार्वजनिक नहीं की।
लगातार 72 दिनों तक चले अधिवक्ताओं के उस बड़े आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन भी मिला था, क्योंकि राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त थी। आंदोलन की समाप्ति की घोषणा के वक़्त जिला अधिवक्ता संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा था कि जिला प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद हम आंदोलन को स्थगित कर रहे हैं, यदि शीघ्र हमारी माँगें पूरी नहीं हुई तो हम पुनः उग्र आंदोलन करेंगे। लेकिन आंदोलन समाप्ति के चार माह बाद भी अधिवक्ता संघ की मांगों पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सका है, जिससे अधिवक्ताओं में शनैः शनैः फिर से आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ऐसी स्थिति रही तो अधिवक्ता संघ का आंदोलन कहीं दुबारा न खड़ा हो जाए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
