February 22, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

रक्षाबंधन पर भद्रा की छाया: 11 अगस्त को रात्रि रक्षाबंधन : विजय पंडा

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रक्षाबंधन पर भद्रा की छाया: 11 अगस्त को रात्रि रक्षाबंधन : विजय पंडा

रायगढ़ :- हिन्दू सनातन धर्म का प्रमुख त्यौहार “रक्षा बंधन” का त्यौहार भाई बहन की विश्वास स्नेह का प्रतीक का त्यौहार है ।इस वर्ष – 2022 में 11 अगस्त को मनाया जावेगा रक्षाबंधन का महापर्व।पुराणिक ग्रन्थों के अनुसार रक्षा बंधन एवं होली का पर्व भद्रा काल मे नही मनाए जाने का उल्लेख किया गया है। भद्रा मुक्त काल में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधकर स्नेह – विश्वास- सुरक्षा का संकल्प लेती है एवं भाइयों की सुख- समृद्धि एवं जीवन मे उनकी ध्वज पताका लहराते रहने की कामना करती हैं। सन 2022 में 11 अगस्त दिन गुरुवार को भारत वर्ष में रक्षाबन्धन का त्यौहार मनाया जावेगा।यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है जो इस वर्ष 11 अगस्त दिन गुरुवार को पूर्वान्ह 10 .38 बजे से पूर्णिमा 12 अगस्त दिन : शुक्रवार को प्रातः 07.05 बजे तक रहेगी।भद्रा का काल प्रातः10.38 बजे से पूर्णिमा तिथि के साथ रात्रि 08.52 बजे तक रहेगी ।इस कारण सनातन धर्मी रात्रि 08.52 बजे बाद अपने भाइयों की कलाई पर बहनें उत्साहपूर्वक राखी बाँध सकेंगी।

निर्णयामृत के अनुसार : यदि दिन में भद्रा हो तो रात्रि में रक्षाबंधन किया जा सकता है।

कौन है भद्रा ?
भद्रा भगवान सूर्य की बहन सूर्य की पत्नी छाया के गर्भ से उतपन्न श्री शनिदेव जी की बहन हैं।कुरूप काले बिखरे बालों वाली भद्रा की विवाह विषयक हेतु श्री सूर्य ब्रह्मा के साथ विचार किए। ब्रम्हा जी ने भद्रा से कहा कि तूम बब बालव कौलव करण के अंत में निवास करो एवं जो व्यक्ति शुभ यात्रा मांगलिक कार्य गृह प्रवेश व्यापार उद्योग तुम्हारे समय में करे उन्हें ही विघ्न पहुँचाव। तीन दिन तक किसी प्रकार की बाधा न डालते हुए चौथे दिन के आधे भाग में जो तुम्हारी आराधना करेंगे उनके कार्य सिद्ध करना।इस प्रकार भद्रा की उतपत्ति हुई।भद्रा के अन्य नाम धन्या दधिमुखी खरानना कालरात्रि महारुद्रा विष्टि कुलपुत्रिका भैरवी महाकाली असुरक्षयकरी इन बारह नामों को स्मरण करता है उनके कार्य सिद्ध होते हैं।युद्ध राजकार्य में सिद्धि प्रदान करती है ।पंचांग में विष्टि करण को भद्रा की संज्ञा दी गयी है।
रक्षाबंधन व होली भद्रा काल में नही करनी चाहिए।भद्रा काल विष कार्य एवं युद्धादि कार्य में सिद्ध होते हैं।

रक्षा का मंत्र है कि – दानवों का राजा महाबली राजा बलि जिससे बाँधे गए थे उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ। रक्षे इस कारण से मैं तुम्हे बाँधता हूँ।तू चलायमान न होना अचल रहना।

11 अगस्त को भद्रा कहाँ रहेगी ?
मकर राशि मे चन्द्रमा होने के कारण भद्रा अधोमुखी पाताल लोक में रहेगी।प्रायः अन्य लोक से अच्छी मानी जाती है।

भद्रा में क्यों नही बाँधने चाहिए राखी?
राखी भद्रा में नही बाँधनी चाहिए इसके लिए एक पौराणिक कथा है रावण की बहन सूर्पणखा ने अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधा था । उसी वर्ष उसके महाबली भाई का विनाश हो गया था एवं ब्रह्मा जी ने माता भद्रा को मांगलिक कार्य मे अशुभ परिणाम करने का श्राप दिया था।

राखी बाँधने का शुभ समय क्या है ?
11 अगस्त दिन गुरुवार को रात्रि 08.52 से 09.14 रात्रि तक का समय उचित माना जा सकता है। विजय पंडा घरघोड़ा मो0 9893230736

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