रामनिवास टाकिज के पिछे अंग्रेजी-देशी शराब दुकान के बाहर गंदगी का अंबार, जिम्मेदार बेपरवाह

रामनिवास टाकिज के पिछे अंग्रेजी-देशी शराब दुकान के बाहर गंदगी का अंबार, जिम्मेदार बेपरवाह
रायगढ़ — शहर की रामनिवास टाकिज पिछे की अंग्रेजी एवं देशी शराब दुकान के बाहर इन दिनों गंदगी का गंभीर आलम देखने को मिल रहा है। दुकान के आसपास कचरे का ढेर, प्लास्टिक गिलास, पानी की बोतलें, पॉलिथीन और खाने-पीने के अवशेष बिखरे पड़े हैं। स्थिति यह है कि शराब खरीदने और सेवन करने आने वाले लोगों को इसी गंदगी के बीच बैठकर शराब पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल क्षेत्र की स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों में बीमारी फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शराब दुकान के बाहर नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण दुर्गंध फैल रही है। बरसात या नमी के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ने का खतरा बना रहता है। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को भी इस गंदगी से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग का ध्यान केवल शराब बिक्री पर केंद्रित है, जबकि दुकान परिसर और उसके आसपास की साफ-सफाई की जिम्मेदारी को नजरअंदाज किया जा रहा है। अधिकारियों के एसी कमरों में बैठकर काम करने की चर्चा आम है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी दिखाई नहीं देती। सवाल यह उठता है कि जब शराब दुकान से प्रतिदिन अच्छी-खासी आय होती है, तो क्या उसके एक हिस्से का उपयोग परिसर की साफ-सफाई और व्यवस्था सुधारने में नहीं किया जा सकता?
नगर पालिका और आबकारी विभाग दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस समस्या को गंभीरता से लें। नियमित सफाई, कूड़ेदान की व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि गंदगी फैलाने वालों पर रोक लगाई जा सके। साथ ही, शराब सेवन के लिए निर्धारित स्थान की स्पष्ट व्यवस्था हो, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था न फैले।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र कार्रवाई कर क्षेत्र को स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जाए। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो गंदगी के कारण संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ सकता है। स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है—जिसे निभाने में संबंधित विभागों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
