तहसील कार्यालय में हंगामा, भाजपा नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप

तहसील कार्यालय में हंगामा, भाजपा नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
पत्थलगांव तहसील कार्यालय में इन दिनों कई गंभीर विवादों के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां पर चल रहे 170 ख के प्रकरण, फर्जी रजिस्ट्री, आदिवासियों की ज़मीन को गैर आदिवासियों के नामांतर किए जाने जैसे मुद्दे लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इसी बीच, गुरुवार की शाम तहसील कार्यालय में एक बड़ा विवाद उत्पन्न हुआ, जब भाजपा के स्थानीय नेताओं ने

कार्यालय के बाहर एसडीएम के खिलाफ हंगामा किया। इस हंगामे के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मौके पर पुलिस प्रशासन को भी बुलाना पड़ा।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय के अधिकारी उनकी बातों को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि एसडीएम और अन्य अधिकारी कर्मचारियों द्वारा किसी भी मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया जाता और पूरी तहसील कार्यालय बाबूगिरी के चपेट में आकर भ्रष्टाचार की आगोश में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आदिवासियों की ज़मीनों के नामांतर का कार्य गैर आदिवासियों के पक्ष में किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदाय को नुकसान हो रहा है। इन आरोपों को लेकर भाजपा नेताओं ने आक्रोश व्यक्त किया और इसे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के रूप में देखा।
तहसील कार्यालय में लंबे समय से चल रहे 170 ख के प्रकरण और फर्जी रजिस्ट्री के मामलों पर भी भाजपा नेताओं ने आरोप लगाए। उनका कहना था कि इन मामलों में गड़बड़ी हो रही है और इसके माध्यम से अवैध तरीके से भूमि हड़पने की कोशिशें की जा रही हैं। भाजपा नेताओं का कहना था कि इन मामले को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अधिकारियों ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। इन मुद्दों को लेकर उन्होंने एसडीएम पर लापरवाही का आरोप भी लगाया और मांग की कि प्रशासन इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए, भाजपा नेताओं के हंगामे के बीच पुलिस प्रशासन को भी बुलाना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत किया और किसी तरह विवाद को नियंत्रित किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई, लेकिन मामला अब भी सुर्खियों में बना हुआ है।
भाजपा नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और प्रशासन के खिलाफ भड़ास निकाली। उन्होंने प्रशासन के भ्रष्टाचार और लापरवाही को लेकर कई पोस्ट शेयर किए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
वहीं, एसडीएम कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों ने इस तरह की किसी भी घटनाक्रम को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की। उनका कहना था कि तहसील कार्यालय में कोई हंगामा नहीं हुआ और एसडीएम से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई। प्रशासन ने इस मामले को नकारते हुए इसे केवल एक गलतफहमी बताया और कहा कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भलीभांति काम कर रहे हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
इस विवाद के बाद, भाजपा नेताओं ने तहसील कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाएंगे। भाजपा नेताओं का कहना था कि अगर एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की जांच की जाए, तो कई बड़े मामलों का खुलासा हो सकता है।
इस मामले में अब जिले के बड़े भाजपा नेताओं के समक्ष स्थिति है। यह देखना बाकी है कि भाजपा नेताओं का दबाव प्रशासन पर कितना असर डालता है और क्या इस विवाद का कोई ठोस समाधान निकलता है। फिलहाल, यह मामला प्रशासन और भाजपा के बीच एक नई राजनीतिक बहस का कारण बन चुका है, जिसे लेकर दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
जिले के बड़े भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन से जवाबतलब किया है, और यह भी कहा है कि यदि भ्रष्टाचार की जांच की गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि तहसील कार्यालय में कितने बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां चल रही हैं। अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और भाजपा नेताओं के आरोपों की जांच किस दिशा में जाती है।
फिलहाल, यह मामला पूरी तरह से गर्माया हुआ है और प्रशासन को अपनी छवि सुधारने के लिए जल्द कोई ठोस कदम उठाना होगा। यह घटनाक्रम न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक बन सकता है।
