रायगढ़ नगरी का संजय मार्केट हुआ चौपट राजा का शिकार
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रायगढ़ नगरी का संजय मार्केट हुआ चौपट राजा का शिकार
रायगढ़, 18 जून 2023,आजाद भारत का एक छोटा सा हिस्सा जिसे रायगढ़ के नाम से जानते हैं ! जहां प्रचुर मात्रा में खदाने एवं सैकड़ों की संख्या में उद्योग धंधे स्थापित है! इसके साथ ही लाखों की जनसंख्या वाली इस रायगढ़ शहर में मूलभूत सुविधाओं का पुरजोर अभाव है ! जिनमें से एक बहुत बड़ी समस्या सब्जी बाजार अर्थात संजय मार्केट की है , यह मार्केट ना केवल आम लोगों के लिए समस्या का विषय बना हुआ है बल्कि उन खास लोगों के लिए भी समस्या का विषय है जो इन आम लोगों के घरों तक सब्जी बेचकर लोगों के जायके को बेहतर करने का काम करते हैं! उसी संजय मार्केट को सुव्यवस्थित और सुसज्जित करने की मांग बरसों से चली आ रही है, और इस मांग को घोषणा पत्र में डालकर कई निष्क्रिय लोग पार्षद से महापौर तक बने , किंतु आज पर्यंत उस संजय मार्केट का कोई भला नहीं हो पाया ! उड़ती खबरों के अनुसार 1 वर्ष से अधिक समय बीत चुके , सरकार के द्वारा राशि स्वीकृत कर दी गई है, किंतु विडंबना है की अब तक संजय मार्केट व्यवस्थित और सुसज्जित नहीं हो पाया ! जब इच्छा शक्ति ही ना हो नगर निगम की और रायगढ़ नगर निगम की महापौर तथा रायगढ़ विधायक की ! तो भला यह कार्य कैसे संभव हो सकता है !
हालांकि भारत में लोकतंत्र स्थापित है , किंतु कई बार लोकतंत्र की आड़ में कुछ ऐसे फैसले हो जाते हैं जिसका भुगतान लोगों को 5 साल तक भुगतना पड़ता है ! क्योंकि यदि क्षेत्र का विधायक और निगम का महापौर दोनों कर्तव्यनिष्ठ हो तो किसी भी वैधानिक कार्य को बहुत आसानी से अमलीजामा पहनाया जा सकता है और उसमें भी तब जब राज्य में सरकार भी उन्हीं की हो किंतु यहां मुख्यमंत्री से लेकर विधायक और महापौर और निगम में पार्षदों की बहुलता एक ही दल के होने के बावजूद भी किसी बड़े काम को करने में अक्षम होना निश्चित ही लोकतंत्र की कहीं ना कहीं असफलता सिद्ध होती है !
यह बात इसलिए लिखनी पड़ रही है कि वर्तमान परिस्थिति में महापौर का चुनाव सभी पार्षद में से ही एक व्यक्ति को पार्षदों द्वारा ही बहुमत के आधार पर चुना जाता है ! और गुटबाजी इतनी हावी हो जाती है की नेतागण यह भूल जाते हैं कि हमें एक कर्मठ व्यक्तित्व का चुनाव करना है ! क्योंकि निगम का दायित्व जब तक किसी मजबूत कंधे पर नहीं डाला जाएगा तब तक निगम क्षेत्र का यही हाल होगा और निगम का सुचारू रूप से चलना मुश्किल है ! और इसी जिद और कमजोर नेतृत्व का खामियाजा रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र के रहवासी भुगत रहे हैं ! आज यदि इसी जगह कोई मजबूत इरादे का व्यक्ति महापौर चुनकर आता तो शायद संजय मार्केट अपनी दुर्दशा के आंसू ना गिरा रहा होता और आज वह पूरी तरह सुसज्जित अपने नए कलेवर में रायगढ़ वासियों के लिए नई सौगात बनकर गौरव का पताका फहरा रहा होता !
किंतु कुछ तथाकथित नेताओं के जिद की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है !
लेकिन रायगढ़ की जनता भी इस बात को भली-भांति जानती है कि गलती तो उनसे भी हुई है! पहली गलती इतने तेजतर्रार विधायक चुनकर और दूसरी गलती लगातार निगम वासियों के हितों को सवारने मैं लगी रहने वाली महापौर के रूप में , अब आने वाला समय ही बताएगा की जनता फिर से इन पर विश्वास जताती है या किसी और चेहरे पर अपनी निगाहें जमाती है! बहर हाल रायगढ़ की जनता अब अंतिम दांव के इंतजार में है कि क्या विधानसभा चुनाव के पूर्व संजय मार्केट का उद्धार होगा अथवा नहीं ?
