April 15, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

एसईसीएल कोयला खदान को जमीन देने सर्वे करने पहुंचे तहसीलदार पटवारी आर.आई दल को ग्रामीणों ने खदेड़ा

Spread the love

तमनार – दिनांक 20/04/2023 को तहसील तमनार के तहसीलदार अनुज पटेल तमनार के 4-5आर आई एवं 8-10 पटवारी मिल कर एसईसीएल कोयला खदान का सर्वे करने पहुंचे थे। जैसे ही लालपुर, उरवा, पेलमा, सक्ता जरहीडीह एंव अन्य गांवों के लोगों पता चला कि उनके गांवो क्षेत्र का सर्वे करने तहसीलदार अनुज पटेल, अपने दल बल के साथ पहुंचे हैं उसके बाद पूरे क्षेत्र के ग्रामीणो एकता होकर मौके पर पहुंचे और तहसीलदार एवं आर आई , पटवारी द्वारा किया जा रहा सर्वे का विरोध करते हुए उन्हें अपने गांवों से खदेड़ दिया , विदित हो कि
इस कोयला खदान क्षेत्र में 14 गांव आते हैं यह कोयला खदान एसईसीएल को 2010 में दी गई थी जिसका विरोध ग्रामीणों द्वारा 2010 से ही करते आ रहे हैं, वहीं आस-पास के कोयला खदान प्रभावितों का कहना है कि उन्हें यैसा विकास नहीं चाहिए । ग्रामीणों द्वारा अपने-अपने ग्राम सभा में कोयला खदान के विरोध में प्रस्ताव पास करके जिला प्रशासन व राज्य सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार को कई बार दें चुके हैं।
कुछ दिन पहले ही एसईसीएल कोयला खनन का समझौता अदानी से 6008 रू 22 बरसों के लिए किया जिसके विरोध में 20 फरवरी 2023 से पेलमा गांव से तीन दिवसीय पदयात्रा कर विरोध पत्र कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टीस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टीस एवं राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया था। जिस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे ग्रामीणों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे ग्रामवासी अपने जल, जंगल और जमीन किसी को नहीं देंगे।
देश में विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए बड़े-बड़े उद्योगपतियों को सरकार की खुली सहमति मिली हुई है। देश और जनता के विकास का ढोल पीटते हैं लेकिन इसमें जनता का हिस्सा तो ऊंट के मुंह में जीरा ही होता है। जबकि उद्योगपति स्वयं के विकास के लिए जल, जंगल और जमीन का मनमानी और भरपूर दोहन करते हैं। देश का हर वह हिस्सा, जहां खनिज संसाधनों का पर्याप्त भंडारण है, खोदते और खनिज निकालते हुए वहाँ के आदिवासियों को विस्थापित कर उन्हें स्थानीय प्राकृतिक सुविधाओं से महरूम कर रहे हैं। जीव-जंतुओं के साथ-साथ ग्रामीणों का जीवन खतरे में पड़ गया है। सालों पहले दिनांक
5/ 1/ 2008 को जब गारे 4/6 कोयला खदान की जनसुनवाई गारे और खम्हरिया गाँव के पास के जंगल में की गई। वास्तव में ढाई सौ एकड़ में फैला हुआ यह जंगल गाँव वालों के निस्तारण की जमीन थी, जिसे बहुत चालाकी से वन विभाग ने सन 1982 में रेशम परियोजना के लिए हासिल कर लिया था। गाँव वालों को इस बात के लिए सहमत किया गया था कि रेशम परियोजना में उन लोगों को काम मिलेगा और आर्थिक आधार पर उन्हें मजबूती मिलेगी। लेकिन यैसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि रेशम विभाग और वन विभाग की मिलीभगत से यह जमीन मुफ़्त में जिंदल उद्योग को कोयला खनन के लिए दे दी गई। जबकि सरकारी दस्तावेजों में यह क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची में शामिल है जिसका मतलब है कि यह एक आदिवासी गाँव है। इसमें नियमानुसार ऐसी जमीन किसी गैर आदिवासी को नहीं दे सकते हैं
इसके बावजूद खनन के लिए जमीन बिना गाँव वालों की सहमति के वगैर जिंदल कंपनी को सौंप दी गई। एक तरह से बिना जनसुनवाई के अथवा फर्जी जनसुवाई कर जिंदल प्लांट के मजदूरों और बाहर से बुलाए गए लोगों को स्थानीय किसान बनाकर सहमति ली गई। जिंदल ने मनमुताबिक जनसुनवाई करवाकर ज़मीन अपने पक्ष में कर ली। जब इसकी जानकारी गाँव वालों को हुई तो उन्होंने इसका जमकर विरोध किया था वे सभी जनसुनवाई रद्द करवाने पर अड़ गए थे तब जिंदल ने अपने धन बल से कानुन का सहारा लिया और गांव वालों को डराने के लिए पूरा एरिया में पुलिस छावनी में तब्दील करा दिया था और जनसुनवाई में उपस्थित हजारों ग्रामवासियों अपने हक के लिए आवाज़ उठा रहे थे जिसमें पुरुषों, महिलाओं और बच्चों शामिल थे वहीं जिंदल ने ग्रामीणों की आवाज दबाने के लिए पुलिस-प्रशासन का सहारा लेकर उन भोले भाले ग्रामीणों के ऊपर बर्बरतापूर्वक लाठी चलवा दी, जिसमें अनेक ग्रामीण लहूलुहान हुए, चोट आई, बेहोश हुए। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था

डॉ हरिहर पटेल पाँच दिन तक बेहोशी की हालत में रहे। उन्हें नाक में बहुत चोट आई थी। और की समाजिक नेता भी गंभीर हुए थे , उस बुरे दिन के याद में 55 गांव के ग्रामीण एक जुट होकर प्रति वर्ष 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन कोयला सत्याग्रह में शामिल होते हैं। ग्राम वासियों का कहना है
पुलिस वालों ने ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया था उस दिन को ग्रामीणों कभी नहीं भुलेंगे वे जिंदल के बहुत दमन झेला लेकिन वे टूटे नहीं। मरते दम तक अपने जल जंगल जमीन के लिए लड़ते रहेंगे,

Open Book

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.