मुख्यमंत्री के गृह जिला में आदिवासी जमीन घोटाले पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष यू. डी. मिंज ने सरकार को घेरा
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मुख्यमंत्री के गृह जिला में आदिवासी जमीन घोटाले पर
कांग्रेस जिला अध्यक्ष यू. डी. मिंज ने सरकार को घेरा,
यू. डी. मिंज ने बताया आदिवासी जमीनों का घोटाला नेताओं, भू-माफियाओं और अफसरों के ‘अपवित्र’ गठजोड़
जशपुर नगर । छत्तीसगढ़ में आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को लेकर जारी दावों के बीच, मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा पत्थलगांव में एक आदिवासी जमीन घोटाला को लेकर यू. डी. मिंज ने सरकार और मुखिया विष्णुदेव साय पर तीखा आरोप लगाया है
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने कड़े शब्दों में मुख्यमंत्री और विधायक गोमती साय के करीबी नेताओं, सरकार के चाटुकार अफसरों और स्थानीय भू-माफियाओं के बीच के ‘अपवित्र’ गठजोड़ पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में आदिवासी समाज की कीमती जमीनों को षडयंत्रपूर्वक प्रभावशाली लोगों के नाम किया जा रहा है। यह आरोप इस मामले को और अधिक गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना देता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की गृह विधानसभा और जिले में ही हो रहा है।
असल मामला पत्थलगांव क्षेत्र में आदिवासी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का है, जो अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। जिला अध्यक्ष के अनुसार, यह कोई साधारण घोटाला नहीं है, बल्कि एक “सुनियोजित साजिश” है। खसरा नंबर 513 , 333 की जमीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने खुलासा किया कि सरकार से जुड़े स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर जमीनों के नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड में “बड़ा फेरबदल” किया है। यह सब कुछ “नियमों का दुरुपयोग” करके और कानूनों को ताक पर रखकर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है। “बरगलाकर कराई जा रही रजिस्ट्री के आरोपों” के साथ सोमवार को सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने पत्थलगांव में रैली निकालकर जोरदार विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों का आक्रोश इतना अधिक था कि उन्होंने तहसील कार्यालय का घेराव किया और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।उन्होंने कहा कि रैली के दौरान “आदिवासियों का शोषण बंद करो”, “जमीन दलालों और भू-माफियाओं पर कार्रवाई करो”, और “फर्जीवाड़ा बंद करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि ज्यादातर मामलों में आदिवासियों को बरगलाकर उनके नाम पर रजिस्ट्री कराई जा रही है, जबकि जमीनों का वास्तविक नियंत्रण रसूखदार लोगों के पास ही रहता है। यह सीधे तौर पर आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन है।
विवादित जमीन का ‘गंदा खेल’: किसे मिल रहा फायदा?
कांग्रेस जिला अध्यक्ष के आरोपों के अनुसार, रायगढ़ रोड स्थित चिल्हापारा वार्ड क्रमांक 07 और 08 की जमीनों के हस्तांतरण में भी कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से नक्शों में बदलाव, फर्जी नामांतरण, और जमीन विक्रय का ‘खेल’ लंबे समय से जारी है।
प्रशासन की ‘खामोशी’ पर सवाल! कलेक्टर को शिकायत के बावजूद नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
यह सबसे चिंताजनक पहलू है कि आदिवासी समाज द्वारा कलेक्टर को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर रजिस्ट्री कराई गई, यहाँ तक कि मृत व्यक्तियों के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का हस्तांतरण किया गया। इसके अलावा, सरकारी और सड़क किनारे की जमीनों की बिक्री के आरोप भी लगाए गए हैं।
जिम्मेदार कौन? कटघरे में कई बड़े नाम! जिला स्तरीय जांच की मांग
कांग्रेस जिला अध्यक्ष यू. डी. मिंज ने कहा कि इस कथित बड़े जमीन घोटाले में कई नामों पर सवाल उठ रहे हैं।जिसमें तत्कालीन पटवारी मदन भगत,तहसीलदार बी. कुजूर
बाबू राजू भगत, भाजपा नेता
अंकित बंसल, अजय बंसल
रम्मू शर्मा, परशुराम अग्रवाल
सुरेश यादव समेत अन्य पर मिलीभगत कर नक्शे में बदलाव करने का आरोप लगाया गया है।
साथ ही, सड़क किनारे की जमीनों को बेनामी तरीके से बेचकर कब्जा दिलाने और पक्के निर्माण कराने के मामले में भी गंभीर सवाल उठे हैं।
इस पूरे मामले में एसडीएम श्री बिसेन, राजस्व निरीक्षक सुकरा, पटवारी राठिया और पूर्व तहसीलदार प्रांजल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
तो जिला प्रशासन को आदिवासी समाज के द्वारा उठाय गए इस पूरे मामले की जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. हर जाँच को दबाने में क्यों अपनी भूमिका निभाता है जिला प्रशासन यह भी चिंतनीय है.
उन्होंने कहा फिलहाल, पत्थलगांव क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश चरम पर है और आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। “कांग्रेस जिला अध्यक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के गृह जिला में हो रहा यह कड़ा आरोप” राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा चुका है और इस पूरे मामले में आने वाले दिनों में और भी कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
एक बड़ा सवाल अभी भी बरकरार: सरकारी कर्मचारियों ने कैसे अपने रिश्तेदारों के नाम पर कराई जमीनों की रजिस्ट्री?
इस कथित घोटाले में एक और बड़ा सवाल उठ रहा है कि सरकारी कर्मचारियों ने अपने ही रिश्तेदारों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कैसे कराई? क्या उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर बेनामी सौदों के जरिए कीमती जमीनों का ‘खेल’ खेला है? इस पूरे मामले में कई और बड़े नाम सामने आ रहे हैं, जिनकी जांच कराकर सुशासन की सरकार को सही तथ्य जनता के सामने रखना चाहिए. चाटुकारिता में डूबी प्रशासन सुशासन तिहार में कुछ तो सुशासन के लिए करके दिखाए कि जनता का विश्वास कायम हो।
