April 15, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

शेखरपूर अघौड आश्रम काली मंदिर मे दिवाली की शुअवसर पर मां काली की विशेष पूजा अर्चना की गई

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ेखरपूर अघौड आश्रम काली मंदिर मे दिवाली की शुअवसर पर मां काली की विशेष पूजा अर्चना की गईपत्थलगांव शेखरपूर अघौड बाबा आश्रम पर स्थिति काली मंदिर मे विराजमान मां काली जी की दिवाली के शुअवसर पर विशेष विधि विधान से पूजा अर्चना की गई । दिवाली पर्व दीप उतसव देशभर मे लोग अपने घर में लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हैं इसी रात को काली मां जी की भी पूजा होती है
अमावस्या की रात को अक्सर ‘काली रात’ या ‘अंधकार की रात’ कहा जाता है. इस विशेष समय पर मां काली की आराधना इसलिए की जाती है क्योंकि उनका रौद्र रूप शांत होता है और वे अंधकार पर विजय प्राप्त करने वाली शक्ति का प्रतीक हैं. यह पूजा : दिवाली की आधी रात को मां काली की पूजा की जाती है न केवल नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है, बल्कि भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति भी प्रदान करती है.
अघौड आश्रम बाबा संतोष जी ने बताया कि *अंधकार पर जीत का प्रतीक*: अमावस्या का समय अंधकार और निष्क्रियता का प्रतिनिधित्व करता है. मां काली की पूजा इस बात का संदेश देती है कि अंधकार चाहे जितना भी घना हो, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा अंत में उसकी जीत ले जाते हैं.
दुष्ट शक्तियों का नाश: मां काली की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियाँ दूर होती हैं. इससे भय, संकट और जीवन की बाधाएँ कम होती हैं और भक्त सुरक्षित महसूस करते हैं.
आत्मविश्वास और साहस का संचार: उनकी पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ता है. जीवन में आने वाली मुश्किलों का सामना आसानी से किया जा सकता है.
आध्यात्मिक उन्नति: माना जाता है कि मां काली की भक्ति से आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह पूजा मन और आत्मा दोनों के लिए संतुलन और शांति लाती है.
अघौड परंपराओं में, अमावस्या की रात तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधना के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस समय की पूजा से साधना में अधिक शक्ति और सफलता मिलती है
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही मां काली प्रकट हुई थीं. इस इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि इस समय उन्होंने बुराई और दुष्ट शक्तियों का नाश करने के लिए अवतार लिया था कि जब राक्षसों और अधर्म का वर्चस्व बढ़ गया था, तब देवी दुर्गा के क्रोध से मां काली प्रकट हुईं और उन्होंने मधु और कैटभ जैसे राक्षसों का विनाश किया. इस दिन की पूजा से न केवल बुरी शक्तियाँ दूर होती हैं, बल्कि भक्तों को साहस और आंतरिक शक्ति भी मिलती है. श्रद्धा और भक्ति के साथ मां काली की आराधना करना शुभ और फलदायी माना जाता है। ‘अंधकार की गहरी रात’ माना जाता है, जब मां काली का रौद्र रूप शांत होकर अंधकार पर विजय पाने वाली शक्ति का प्रतीक है. पूजा से नकारात्मक ऊर्जा का नाश और भक्तों को साहस व आत्मविश्वास मिलता . .. शुअवसर पर श्रीमती कृति बाला दुगा जी ने मां की शरण में महाप्रसाद अर्पण किया एवं भक्तो के भोजन व्यवस्था मे सहभागिता निभाई अघौड आश्रम के बाबाओ सहित अम्बिकापुर रायगढ जशपुर कोरबा उडीसा झारखंड बनारस ओर आस पास के ग्रामवासी एवं दूर से भक्तजन मां की पूजा शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किए ।

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