किलकिला मंदिर परिसर में 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ ,की शुभारंभ . . . . श्रद्धालुओं ने लिए जीवन संवारने के संकल्प


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िलकिला मंदिर परिसर में 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ ,की शुभारंभ . . . . श्रद्धालुओं ने लिए जीवन संवारने के संकल्पपत्थलगांव किलकिला महादेव मंदिर परिसर के तपोभूमि पर श्री श्री 10008 तपस्वी बाबा कपिल मुनि जी की सान्निध्या मे आज 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ की शुभारंभ हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परम श्रद्धा के साथ गायत्री और यज्ञ के दिव्य संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का दृढ़ संकल्प लिया।
आयोजित इस यज्ञ में श्रद्धालुओं ने प्राणवान वातावरण में विश्व कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ देवता को गायत्री, महामृत्युंजय मंत्र सहित अनेक पवित्र मंत्रों की आहुतियां अर्पित कीं। .इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गर्मी में पक्षियों के लिए पानी के पात्र लगाने, पेड़-पौधों को नियमित रूप से जल देने, भोजन की बर्बादी न करने, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग न करने, नशा त्यागने और सूर्य भगवान को अर्घ्य देने जैसे महत्वपूर्ण संकल्प भी लिए।
मां गायत्री, गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और भगवती देवी शर्मा के पंचोपचार पूजन के पश्चात उद्गाता बंधुओं ने मधुर प्रज्ञागीतों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ मुख्यअतिथि महाकुल समाज प्रांतीय पूर्व अध्यक्ष श्री डमरू यादव एवं गायत्री परिवार , गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के सहित वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने देव पूजन किया।
अयोजित कार्यक्रम मे बताया कि शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक ने हवन को दैनिक जीवन में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने यज्ञ के वास्तविक अर्थ – दान, देव पूजन और संगतिकरण को स्पष्ट किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील कि जिस भाव और श्रद्धा के साथ उन्होंने दो दिनों तक यज्ञ किया, उसी भावना को वे अपने घरों में नियमित रूप से जारी रखें। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का विद्यारंभ संस्कार भी यज्ञ के पवित्र वातावरण में संपन्न कराया गया।
चोला फाईनेंस अफसर दिनेश यादव ने कहा कि जो बच्चे नियमित रूप से गायत्री महामंत्र का जाप करते हैं, वे मेधावी और प्रज्ञावान बनते हैं। गायत्री महामंत्र एवं आध्यात्मिक प्रसंग में हमने भगवान को केवल मांगने का साधन बना लिया है। यदि हम भगवान से कुछ याचना करना चाहते हैं, तो वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी के स्वास्थ्य, कल्याण और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी होना चाहिए।
पूर्व अध्यक्ष डमरू यादव कहा कि भगवान श्रद्धा और भाव के भूखे हैं, और यज्ञ में अर्पित की गई भावनापूर्ण आहुति का फल हजार गुना अधिक होता है। . .यज्ञ स्थल पर पीतांबरधारी परिजनों ने अनिष्ट निवारण और शहीदों की आत्मशांति के लिए विशेष आहुतियां दीं गायत्री साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से गायत्री मंत्र लेखन या प्रतिदिन पांच गायत्री चालीसा का पाठ करने का आग्रह किया। यदि करोड़ लोग प्रतिदिन एक घंटा साधना करें, तो उसका प्रभाव परमाणु बम से भी हजार गुना अधिक शक्तिशाली होगा।
पुजा शुभारंभ गुरु ईश वंदना, साधनादि पवित्रीकरण, मंगलाचरण, षट्कर्म, पृथ्वी पूजन, संकल्प और चंदन धारण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं को कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा गया। अखिल ब्रह्मांड के प्रतीक कलश और चेतना के प्रतीक दीप का पूजन किया गया। समवेत स्वर में गुरु, मां गायत्री, गणपति सहित तैंतीस देवी-देवताओं का भावपूर्ण आह्वान किया गया। नवग्रह, सर्वतोभद्र और वास्तु मंडल का भी पूजन हुआ। सभी आमंत्रित देवी-देवताओं का पूजा किया गया।
गायत्री और महामृत्युंजय मंत्रों से आहुतियां अर्पित की गईं। यज्ञ में हुई भूलों के लिए क्षमायाचना के रूप में मीठे व्यंजन की आहुति और स्विष्टकृत्होम किया गया। श्रद्धालुओं ने एक बुराई छोड़ने और एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प लेकर , क्षमा प्रार्थना, अनुष्ठान हुए । इस शुअवसर पर पत्थलगांव गोलाबुडा ईला लिप्ती नारायण पुर किलकिला तमता एवं आस पास के गायत्री परिवार ओर श्रद्धालु भक्तगण शामिल रहे । यज्ञ का सफल संचालन रत्नाकर खुटिया ने किया।
