June 13, 2026

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RAIGARH ANCHAL

पंचायत सचिवों की भूख हड़ताल शुरू, शासकीयकरण की कर रहे हैं मांग

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पंचायत सचिवों की भूख हड़ताल शुरू, शासकीयकरण की कर रहे हैं मांग

पत्थलगांव। प्रदेशभर में पंचायत सचिवों ने अपनी शासकीयकरण की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। पत्थलगांव में भी सचिव संघ ने जनपद कार्यालय के सामने धरना स्थल पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर दीप जलाकर व पुष्प अर्पित कर आंदोलन की शुरुआत की। भूख हड़ताल का यह पांचवां दिन है, और सचिव अपनी एक सूत्रीय मांग—नियमित शासकीयकरण—को लेकर अडिग हैं।

पंचायत सचिवों का कहना है कि जब तक सरकार प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को पूरा नहीं करती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले 2 अप्रैल से पंचायत सचिव जनपद स्तर पर आंदोलन कर चुके हैं, साथ ही जिला मुख्यालय में रैली निकाल कर भी अपनी आवाज बुलंद की थी।

सचिवों की हड़ताल का असर ग्राम पंचायतों में साफ नजर आ रहा है। सरपंचों को अब तक पद का प्रभार नहीं मिल पाया है, जिससे ग्राम पंचायतों में सभी विकास कार्य ठप्प पड़ गए हैं। कई पंचायतों में तो सरपंच अब तक पदभार भी नहीं ले सके हैं, क्योंकि सचिव ही उन्हें प्रभार दिलवाते हैं। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से न तो कोई फाइल चल रही है और न ही कोई विकास योजना धरातल पर उतर पा रही है।

पत्थलगांव ब्लॉक की बात करें तो यहां कुल 87 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से अधिकांश में कामकाज रुक गया है। कई पंचायतों में अभी तक कोई भी नया कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है। ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं—जैसे नाली निर्माण, सड़कों की मरम्मत आदि—पर काम नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण रोज सरपंचों के घर पहुंच रहे हैं, लेकिन सरपंच भी बिना सचिवों के कुछ नहीं कर पा रहे।

रोजगार सहायकों को सौंपी गई सचिव की जिम्मेदारी

पंचायत सचिवों की हड़ताल से पंचायत स्तर की व्यवस्था चरमरा गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए शासन-प्रशासन ने आदेश जारी कर पंचायतों में रोजगार सहायकों को आगामी आदेश तक सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। हालांकि यह केवल एक अस्थायी उपाय है, फिर भी इससे कुछ हद तक पंचायत संचालन में राहत मिलने की उम्मीद है।

सचिवों की मांगें जायज हैं या नहीं, यह अलग मुद्दा हो सकता है, लेकिन इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन के प्रति क्या रुख अपनाती है और कब तक सचिवों की यह हड़ताल जारी रहती है।

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