May 31, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

ग्राम सचिवों की हड़ताल: ग्राम विकास पर संकट सचिवों की क्रमिक भूख हड़ताल जारी

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सचिवों की हड़ताल: ग्राम विकास पर संकट
सचिवों की क्रमिक भूख हड़ताल जारीछत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले सहित पूरे राज्य में सचिव संघ अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर निरंतर हड़ताल पर डटे हुए हैं। यह हड़ताल अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुकी है और अब सचिवों ने क्रमिक भूख हड़ताल भी प्रारंभ कर दिया है। सचिव संघ का कहना है कि जब तक छत्तीसगढ़ सरकार उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं देती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।सचिवों की प्रमुख मांग है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए ताकि वे स्थायीत्व, वेतनमान और अन्य लाभों के हकदार बन सकें। उनका तर्क है कि वे ग्राम पंचायतों के संचालन में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं, इसलिए उन्हें भी वही अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए जो अन्य शासकीय कर्मचारियों को मिलती हैं। इस मांग को लेकर सचिव संघ अब राज्य स्तर से बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन ले जाने की तैयारी में है। सचिव संघ ने यह भी घोषणा की है कि प्रत्येक ब्लॉक से 10 ग्राम सचिव दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर केंद्र सरकार से अपनी मांगों को मोदी सरकार की “गारंटी” योजना के तहत रखने की योजना बना रहे हैं।इस हड़ताल का सीधा असर गांवों में देखा जा रहा है। ग्राम सचिवों के कार्य बहिष्कार से ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र जैसी आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया ठप पड़ी है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, वृद्धावस्था पेंशन, और खाद्यान्न वितरण जैसी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।ग्रामवासियों का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना है कि ग्राम सचिव गांव के प्रशासनिक कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं और उनके न होने से गांवों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस हड़ताल को गंभीरता से लेते हुए सचिवों की मांगों पर विचार करे और कोई सराहनीय कदम उठाए ताकि गांवों का सामान्य जीवन फिर से पटरी पर आ सके।कुल मिलाकर, यह आंदोलन न केवल सचिवों के भविष्य और अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि यह ग्रामीणों के जीवन पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है। सरकार को चाहिए कि वह इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाले, जिससे ग्राम सचिवों को न्याय मिले और ग्रामीणों की परेशानी भी समाप्त हो।

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