दंतैल हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत, वन विभाग पर गंभीर आरोप

दंतैल हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत, वन विभाग पर गंभीर आरोप
घरघोड़ा वन परिक्षेत्र से एक बड़ी और दुःखद घटना सामने आई है, जिसमें जंगल में गए एक ग्रामीण की जान एक दंतैल हाथी के हमले में चली गई। यह घटना कल (11 फरवरी 2025) दोपहर की बताई जा रही है। घटना के बाद से घरघोड़ा वन विभाग की लापरवाही को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं। मृतक ग्रामीण का नाम बंधन राठिया (उम्र लगभग 50 वर्ष) है, जो बरौद गांव का निवासी था।
घटना की शुरुआत इस प्रकार हुई कि बंधन राठिया जंगल में लकड़ी काटने के लिए गया था, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटा। परिवार और गांववाले उसे ढूंढने के लिए जंगल में निकले। सुबह जब उन्होंने उसकी लाश को बरौद के जंगल में देखा, तो सभी दंग रह गए। मृतक की लाश छत विक्षत अवस्था में मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हाथी ने उसे पटककर जान से मार डाला।
ग्रामीणों के अनुसार, हाथी इस क्षेत्र में कई दिनों से घूम रहा था और गांव के आसपास लाइट काटने की घटनाएं हो रही थीं, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग द्वारा सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की तरफ से इस क्षेत्र में हाथी के होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी।
वन विभाग ने अपने 11 फरवरी 2025 की रिपोर्ट में यह जानकारी दी थी कि घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में हाथी नहीं है, जबकि घटनास्थल पर एक दंतैल हाथी का मौजूद होना स्पष्ट रूप से इस रिपोर्ट के विपरीत है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या वन विभाग की रिपोर्ट सही थी और यदि सही थी, तो क्या इस हाथी की गतिविधियों के बारे में उन्हें समय पर सूचना मिली थी या नहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की घोर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है। उनके अनुसार, यदि समय रहते हाथी के बारे में जानकारी मिल जाती और सुरक्षा के उपाय किए जाते, तो यह घटना टल सकती थी। हाथियों का आक्रमण लगातार बढ़ रहा है, और इसकी चपेट में आने वाले ग्रामीणों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
इस प्रकार की घटनाओं ने ग्रामीणों के बीच डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। उन्होंने मांग की है कि वन विभाग की तरफ से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिक सुरक्षा उपाय किए जाएं। साथ ही, विभाग के अधिकारियों से यह भी सवाल किया जा रहा है कि आखिरकार उन्होंने इस क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर क्यों नहीं रखी।
समाज के विभिन्न वर्गों का यह भी मानना है कि ऐसे हादसों से निपटने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए। ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ, वन विभाग को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हाथियों के आक्रमण के दौरान उनकी गतिविधियों पर सतर्क निगरानी हो।
इस घटना ने यह भी साबित कर दिया है कि वन विभाग की ओर से सुरक्षा के उपायों की कमी है, और इन उपायों को तत्काल लागू किया जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस घटना के बाद क्या कदम उठाता है और मृतक के परिवार को न्याय मिलने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या वन विभाग द्वारा सुरक्षा इंतजामों की गंभीरता से समीक्षा की जाती है और अगर नहीं, तो क्या भविष्य में इस प्रकार के हादसे नहीं बढ़ेंगे। ग्रामीणों और उनके परिवारों का दिल इस हादसे से टूट चुका है, और उनका कहना है कि अगर इस घटना के बाद सही कदम उठाए जाते हैं, तो शायद आगे कोई और जान नहीं गंवानी पड़ेगी।
