कांशीचुआ पंचायत में लुम्फी बिमारी का प्रकोप आधा दर्जन पशु धन की मौत

कांशीचुआ पंचायत में लुम्फी बिमारी का प्रकोप आधा दर्जन पशु धन की मौत
ग्राम पंचायत काशीचुआ में इन दिनों लुम्फी नामक बीमारी ने भयानक रूप ले लिया है। इस जानलेवा बीमारी के कारण अब तक 6 गाय, बैल और बछड़ों की मौत हो चुकी है। ग्रामवासी इस स्थिति से बेहद चिंतित और दुखी हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी से निजात दिलाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग कोई ठोस कदम उठाने में असफल रहा है।
गांव के लोगों का कहना है कि यदि पशु चिकित्सा विभाग समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाता और बीमार पशुओं का उचित इलाज करता, तो इन बेजुबान पालतू जानवरों की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों के अनुसार, समय पर इलाज न होने की वजह से उनके पालतू जानवर तड़प-तड़प कर मर रहे हैं।
ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब पशुओं में बीमारी फैलने के शुरुआती लक्षण दिखे, तब उन्होंने पशु चिकित्सालय को सूचित किया था, लेकिन विभाग की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई। डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण किसानों को अपने पशुधन का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गांव में गाय, बैल और बछड़े जैसे पालतू जानवर ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा होते हैं। ये जानवर न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार हैं, बल्कि खेती-किसानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक पशु की मौत से किसान को न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि उसके रोजमर्रा के कार्य भी प्रभावित होते हैं।
ग्राम पंचायत काशीचुआ के किसान इस स्थिति को लेकर बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि पशु चिकित्सा विभाग समय पर सहायता प्रदान करता, तो उनकी पशुधन की इतनी हानि नहीं होती।
ग्रामवासियों का कहना है कि विभाग की लापरवाही और ढिलाई के कारण यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते और न ही बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए कोई उपाय किए जा रहे हैं। ग्रामवासियों ने बताया कि लुम्फी जैसी बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है।
ग्राम पंचायत काशीचुआ के निवासियों ने प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से इस समस्या पर तुरंत ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि विभाग को गांव में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर बीमारी का इलाज करना चाहिए। साथ ही, डॉक्टरों को गांव में आकर बीमार पशुओं का इलाज सुनिश्चित करना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी अनुरोध किया है कि सरकार और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लें और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। गांव में पशुधन का नुकसान सिर्फ एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय को प्रभावित करता है।
लुम्फी जैसी बीमारियों के रोकथाम और इलाज के लिए विभाग को सक्रिय होना होगा। पशु चिकित्सालय को न केवल गांव में नियमित रूप से शिविर लगाने चाहिए, बल्कि पशुपालकों को इस बीमारी के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक भी करना चाहिए।
इसके अलावा, सरकार को ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए एक विशेष आपातकालीन टीम का गठन करना चाहिए, जो बीमारियों के फैलने पर तुरंत गांवों में पहुंच सके। पशुधन किसानों की आजीविका का अहम हिस्सा है, और इसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए।
ग्राम पंचायत काशीचुआ में लुम्फी बीमारी से होने वाली मौतों ने ग्रामीणों को गहरे संकट में डाल दिया है। पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही और समय पर इलाज न होने की वजह से ग्रामवासियों को अपने पालतू पशुओं की मौत का दर्द झेलना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभाग को इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए। पशुधन की रक्षा करना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार भी है।

