शहर में स्ट्रीट लाइट लगे तो है पर बंद पड़ा जिम्मेदार मौन

रायगढ़ शहर की सड़कों पर पसरा अंधेरा और बंद पड़ी दर्जनों रोड लाइटें नगर निगम की लापरवाही का प्रतीक बन गई हैं। कुछ वर्ष पहले करोड़ों रुपए खर्च कर नगर निगम ने पूरे शहर को रोशनी से नहलाने के लिए विद्युत पोल और मरकरी लाइट्स लगाए थे, लेकिन आज उचित देखरेख के अभाव में कई इलाकों में ये लाइटें बंद पड़ी हैं। विशेष रूप से कबीर चौक से काशीराम चौक के बीच उड़ीसा रोड पर दर्जनों रोड लाइटें पिछले कई महीनों से बंद हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोड लाइटों की खराबी के कारण इस प्रमुख मार्ग पर रात के समय अंधेरा छाया रहता है। यह इलाका व्यस्ततम क्षेत्रों में आता है, जहाँ से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। अंधेरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, पैदल चलने वाले लोगों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को अंधेरे में असुरक्षा का अनुभव हो रहा है। सब्जी मंडियों और पेट्रोल पंप की वजह से इस मार्ग पर ट्रैफिक रात के समय भी बना रहता है, लेकिन रोड लाइट न होने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम से कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। शिकायतों और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को बार-बार उठाने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब निगम और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी भी इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन फिर भी कोई सुधार नहीं होता।
नगर निगम के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही रोड लाइटों की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा, लेकिन फिलहाल किसी भी प्रकार की कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। आगामी निकाय चुनावों के मद्देनजर यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस समस्या का खामियाजा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और नगर निगम को चुनावों में उठाना पड़ सकता है।
राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने नगर निगम से अपील की है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे को हल किया जाए ताकि शहर की सड़कों पर सुरक्षित और बेहतर यातायात व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।

