संरपच सचिव पर पंचायत फंड का दुरूपयोग करने का लगा आरोप उसके बाद भी कार्यवाही नही

संरपच सचिव पर पंचायत फंड का दुरूपयोग करने का लगा आरोप उसके बाद भी कार्यवाही नही
घड़घोड़ा — रायगढ़ जिले के घरघोड़ा जनपद पंचायत में एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें ग्राम पंचायत के सरपंच पुनिराम राठिया और सचिव गया राम पर पंचायत फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब सामाजिक कार्यकर्ता पूजा साव ने इस अनियमितता के खिलाफ घरघोड़ा जनपद के सीईओ को लिखित शिकायत दी और मामले की जांच की मांग की।
शिकायत के अनुसार, सरपंच पुनिराम राठिया ने पंचायत फंड के पैसे को पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अपनी पत्नी गणेशी राठिया के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद, सरपंच और सचिव ने इन पैसों का गलत ढंग से निजी उपयोग किया। यह पैसा ग्रामीण विकास और पंचायत के कार्यों के लिए आवंटित था, लेकिन इसे व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल कर लिया गया।
ग्राम पंचायत के फंड का इस तरह से दुरुपयोग न केवल नैतिक और कानूनी दृष्टिकोण से गलत है, बल्कि यह ग्रामीणों के विश्वास के साथ भी धोखा है। ग्रामीणों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई और उन्हें गुमराह किया गया। इस प्रकार के अनियमित कृत्य से ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं, जिससे सीधे तौर पर ग्रामीणों के हितों को नुकसान पहुंचता है।
पूजा साव की शिकायत पर घरघोड़ा जनपद पंचायत के सीईओ ने एक जांच टीम का गठन किया और मामले की जांच शुरू की। लेकिन जांच के बाद क्या तथ्य सामने आए, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। ना तो जांच टीम ने कोई रिपोर्ट साझा की और ना ही जनपद पंचायत सीईओ ने शिकायतकर्ता को जांच के परिणामों की सूचना दी।
यह स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है। जब शिकायतकर्ता और ग्रामीणों को जांच के नतीजों की जानकारी नहीं दी जाती, तो इससे संदेह बढ़ता है कि शायद जांच को सही ढंग से नहीं किया गया है या फिर दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यह भी संभव है कि जांच प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया गया हो ताकि समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला जाए।
पूजा साव और अन्य ग्रामीणों का मानना है कि जनपद पंचायत के सीईओ जानबूझकर इस मामले को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सीईओ द्वारा सरपंच और सचिव के कृत्यों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जब प्रशासन के शीर्ष अधिकारी ही इस प्रकार के भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं, तो न्याय की उम्मीद करना कठिन हो जाता है।
यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पंचायत तंत्र की साख पर सवाल खड़ा करता है। अगर इस तरह के अनियमित कृत्यों को प्रशासन द्वारा छिपाया जाता है, तो इससे अन्य पंचायतों में भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
पूजा साव ने घरघोड़ा जनपद पंचायत के सीईओ और जांच टीम की निष्क्रियता के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों को उचित सजा मिल सके। उनका कहना है कि अगर पंचायत के फंड का दुरुपयोग इसी तरह जारी रहा, तो ग्रामीणों के विकास के लिए आवंटित धन कभी भी सही स्थान पर नहीं पहुंचेगा।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता आवश्यक है। प्रशासन को न केवल शिकायतकर्ता बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के सामने जांच के नतीजों को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के संदेह को दूर किया जा सके।
घरघोड़ा जनपद पंचायत में सामने आया यह मामला केवल पंचायत स्तर के भ्रष्टाचार का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के प्रति उसकी उदासीनता को भी दर्शाता है। अगर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं की गई, तो यह पंचायत राज तंत्र में लोगों के विश्वास को कमजोर कर सकता है।
रायगढ़ जिले के घरघोड़ा जनपद पंचायत में एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें ग्राम पंचायत के सरपंच पुनिराम राठिया और सचिव गया राम पर पंचायत फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब सामाजिक कार्यकर्ता पूजा साव ने इस अनियमितता के खिलाफ घरघोड़ा जनपद के सीईओ को लिखित शिकायत दी और मामले की जांच की मांग की।
शिकायत के अनुसार, सरपंच पुनिराम राठिया ने पंचायत फंड के पैसे को पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अपनी पत्नी गणेशी राठिया के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद, सरपंच और सचिव ने इन पैसों का गलत ढंग से निजी उपयोग किया। यह पैसा ग्रामीण विकास और पंचायत के कार्यों के लिए आवंटित था, लेकिन इसे व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल कर लिया गया।
ग्राम पंचायत के फंड का इस तरह से दुरुपयोग न केवल नैतिक और कानूनी दृष्टिकोण से गलत है, बल्कि यह ग्रामीणों के विश्वास के साथ भी धोखा है। ग्रामीणों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई और उन्हें गुमराह किया गया। इस प्रकार के अनियमित कृत्य से ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं, जिससे सीधे तौर पर ग्रामीणों के हितों को नुकसान पहुंचता है।
पूजा साव की शिकायत पर घरघोड़ा जनपद पंचायत के सीईओ ने एक जांच टीम का गठन किया और मामले की जांच शुरू की। लेकिन जांच के बाद क्या तथ्य सामने आए, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। ना तो जांच टीम ने कोई रिपोर्ट साझा की और ना ही जनपद पंचायत सीईओ ने शिकायतकर्ता को जांच के परिणामों की सूचना दी।
यह स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है। जब शिकायतकर्ता और ग्रामीणों को जांच के नतीजों की जानकारी नहीं दी जाती, तो इससे संदेह बढ़ता है कि शायद जांच को सही ढंग से नहीं किया गया है या फिर दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यह भी संभव है कि जांच प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया गया हो ताकि समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला जाए।
पूजा साव और अन्य ग्रामीणों का मानना है कि जनपद पंचायत के सीईओ जानबूझकर इस मामले को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सीईओ द्वारा सरपंच और सचिव के कृत्यों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जब प्रशासन के शीर्ष अधिकारी ही इस प्रकार के भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं, तो न्याय की उम्मीद करना कठिन हो जाता है।
यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पंचायत तंत्र की साख पर सवाल खड़ा करता है। अगर इस तरह के अनियमित कृत्यों को प्रशासन द्वारा छिपाया जाता है, तो इससे अन्य पंचायतों में भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
पूजा साव ने घरघोड़ा जनपद पंचायत के सीईओ और जांच टीम की निष्क्रियता के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों को उचित सजा मिल सके। उनका कहना है कि अगर पंचायत के फंड का दुरुपयोग इसी तरह जारी रहा, तो ग्रामीणों के विकास के लिए आवंटित धन कभी भी सही स्थान पर नहीं पहुंचेगा।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता आवश्यक है। प्रशासन को न केवल शिकायतकर्ता बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के सामने जांच के नतीजों को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के संदेह को दूर किया जा सके।



