जो क्षेत्र पेशा कानून की धारा 5 के तहत आता है वहां औद्योगिक कार्य करना गलत पीड़ित किसानों ने ज्ञापन सौंपा

जो क्ष्ेात्र पेशा कानून की धारा 5 के तहत आता है वहां औद्योगिक कार्य करना गलत पीड़ित किसानों ने ज्ञापन सौंपा
भारतीय संविधान में पेशा एक्ट की धारा 5 जो क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र है वहां लागू किया जाता है पेशा याने जल जंगल जमीन को संरक्षित रखने का कानून । यह कि पेशा याने आदिवासियों के जीवन जीने का साधन जल, जंगल जमीन जो की मुख्य हैं इंसान नही बल्कि धरती का हर प्राणी जल, जंगल, जमीन के साहारे ही जिंदा रहता है इसे यूं कहा जाय कि जल, जंगल, और जमीन के बिना धरती की कल्पना करना व्यर्थ है। इसे यदि नश्ट किया जाता है तो समझो पूरे मानव जीवन और समस्त प्राणियों का विनाश। इसका मतलब है हम पेशा कानून का उल्लंघन कर अपने साथ साथ पूरे प्राणियों को विनाश की ओर धीरे-धीरे ले जा रहे है।
आज जो लोग हैं वे अपने ही जिंदगी के लिए सोच रहे हैं अपने ही पास सब कुछ रहे हम ही जीते जी सभी का भोग कर लें और हमारी जो आने वाली पीढ़ी है उसके लिए हम जल जंगल जमीन को तबाह कर सिर्फ राख छोड़ जाएं ताकि आनी वाली हमारी जो पीढ़ी है वह रोज हमे गाली दे कि हमारे बुजुर्गों ने जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई नहीं लड़ी और आज हम उसी का खामियाजा भुगत रहे हैं और राख की बस्ती पर जीवन यापन कर रहे हैं । इस तरह का कहने का मौका अपने आने वाली पीढ़ी को हम न दें यदि कोई गलत करता रहता है तो उसे देख कर सहन करना भी आपराध है। संविधान ने हमे हमारे हक अधिकार के लिए लड़ने की आजादी दी है। इस पर हमे हमारे आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करने के लिए आगे आना ही होगा नही ंतो विनाश का प्रलय आने से कोई नहीं रोक सकता ।
पूरा शासन प्रशासन तंत्र को ये मालूम है कि तमनार अंचल अब पेशा एक्ट के अंतर्गत आता है फिर भी यहां तमनार अंचल में बेखौफ खनन और उद्योग से संबंधित कार्य किया जा रहा है क्या शासन तमनार विकास खण्ड को समाप्त करना चाहती है। ऐसा लगता है आने वाले समय में तमनार विकास खण्ड के एक एक गांव पर या तो औद्योगीकरण होगा या फिर कोयला का खदान होगा। सरकार अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करती कारपोट और प्रशासनिक डंडे से आम जनता और किसानों को दबाना चाहती है। लेकिन अब और ऐसा होने नहीं दिया जाएगा ग्राम कसडोल में कसडोल व तमनार के किसानों द्वारा सामूहिक सभा रोज किया जा रहा है इससे ऐसा महसूस होता है कि आने वाले दिनों में जो कसडोल की जमीन है जिसे 2009 से भू-अर्जन औद्योगिक प्रयोजन के लिए किया गया था जिसमें कि उद्योग लागाने की जो शासन की सीमा 5 साल है वह समाप्त हो चुका है फिर भी जिंदल कम्पनी के द्वारा जमीन की घेरा बंदी की जा रही है। यहां यह भी बताते चलें कि वर्तमान में कसडोल की भूमि गोढ़ी महलोई कोल ब्लाक में ले लिया गया है। और गोढ़ी से लेकर कसडोल, महलोई से जोबरो बिजना तक कोयला खदान के लिए बोली में लिया गया है। इस पर पीड़ित किसानों का कहना है कि हमारी जमीन को 5 लाख के भाव से लेकर सरकारी सांठ गांठ कर कहीं इस जमीन से आरबों कमाने का विचार जिंदल का तो नहीं है? याने किसान को नंगा करने का काम सरकार कर रही है। कसडोल की आम सभा में किसानों के द्वारा कहा गया कि जिंदल हमारी जमीन को कल के रोज कोयला खदान को देकर मोटा कमाई का जरिया बना रहा है इस लिए जबरन शासन प्रशासन की छत्र छाया में पेशा एक्ट का उल्लंघन करते हुए जमीन को कब्जाने का कार्य किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि जिंदल ही सरकार है यहां सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं है या सरकार जिंदल की रखैल है। यहां यह बात भी बतलाना जरूरी है कि कसडोल खार की जिस जमीन को शासन के द्वारा भू-अर्जन किया गया है वह कृशि भूमि है। भू-अर्जन कानून के अनुसार कृशि भूमि को अर्जन नहीं किया जा सकता। किस तरह से सड़यंत्र कर कृशि भूमि को बंजर बता कर सरकार की आंख में धूल झोंका गया है और कृशि भूमि को अर्जन किया गया है जो कि सरासर गलत है। सरकारो को अब इस बात को बारिकी से अध्ययन करना चाहिए कि जो जमीन कृशि जमीन है उसका किसी भी प्रकार से औद्योगिक प्रयोजन के लिए अर्जन नहीं होना चाहिए नही ंतो आने वाले समय में अनाज की कमी होगी जिसका जवाबदार कौन होगा ।
कसडोल और तमनार के किसान इस बात को समझ चुके हैं कि भू-अर्जन कानून के अनुसार जमीन किसानों का हो चुका है। इस संबंध में वस्तु स्थिति को देखते हुए सभा में उपस्थित किसानों ने निर्णय लिया है कि यदि भू-अर्जन कानून के नियमानुसार कसडोल व तमनार के किसानों की जमीन पर जिंदल द्वारा जो घेरने का कार्य किया जा रहा है वह बंद नहीं किया जाता है साथ ही किसानों की नाम को रकबा खसरा से काट दिया गया है उसे यदि यथावत नहीं किया जाता है तो तमनार व कसडोल के पीड़ित किसान आने वाले दिनों में वृहद आंदोलन करने वाले हैं। ये बात वहां के उपस्थित किसानों ने सर्व सम्मति से बात कहे।
इसके बाद आज तमनार व कसडोल के किसानों द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर कर जिंदल द्वारा जो तमनार और कसडोल की जमीन को आपने कब्जे में लेने के लिए कार्य किया जा रहा है उसके लिए तमनार में तहसीलदार तमनार के साथ साथ, जिलाधीश रायगढ़ को ज्ञापन दिया गया ज्ञापन की सूची में 1 पर जिलाधीश महोदय रायगढ़ 2 में कोल मंत्रालय भारत सरकार 3.में अनुविभागीय अधिकरी घरघोड़ा और 4 में तहसीलदार तमनार हैं। ज्ञापन के विशय में कहा गया है कि ग्राम पंचायत और ग्राम पंचायत तमनार की भूमि पर किसी भी प्रकार का कोई भी औद्योगिक कार्य नहीं करने के संबंध में।
इसके बाद विवरण में जो लिखा गया है वह इस प्रकार से हैः हस्ताक्षरित सभी ग्राम कसडोल व ग्राम तमनार के किसान है। पूरा तमनार विकास खण्ड आदिवासी क्षेत्र है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र में पेशा कानून लागू कर दिया गया है जिसमें पूरा लैलूॅगा विधान सभा क्षेत्र आता है। इस अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी प्रकार किसी भी प्रकार का औद्योगिक संबंधी कार्य करने कि लिए संबंधित ग्राम पंचायत की ग्राम सभा से अनुमति लेना आवश्यक है। यदि बिना ग्राम सभा के अनुमति के बगैर कार्य करना पेशा कानून की धारा 5 उल्लंघन है। कसडोल व तमनार की जमीन को औद्योगिक प्रयोजन के लिए 2009 में धारा 4 का प्रकाशन किया गया और साथ ही 2012 में एवार्ड भी पास कर दिया गया। इसका औद्योगिक निर्माण का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। केन्द्र के आनुसार अर्जित जमीन पर औद्योगिक निर्माण का कार्यकाल साढ़े तीन साल है, और छत्तीसगढ़ संशोधित नियम 5 साल है। अब संबंधित औद्योगिक जमीन पर उद्योग स्थापना का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इस कारण से अधिग्रहित जमीन भू-अर्जन कानून के अनुसार संबंधित किसानों को वापिस किया जाना चाहिए। इसलिए अर्जित की गई भूमि पर किसी प्रकार से कोई भी कार्य करना पेशा कानून के अनुसार अपराध है। इसलिए कसडोल और तमनार की अर्जित जमीन पर किसी भी प्रकार से कोई कार्य नहीं किया जाना चाहिए। इसके आगे ज्ञापन मे लिखा है।
यदि इस जमीन पर पेशा कानून का उल्लंघन कर किसी भी प्रकार से पटवारी, तहसीलदार, राजस्व निरिक्षक या किसी प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी या किसी गैर अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा औद्योगिक प्रयोजन हेतु किसी भी प्रकार का कार्य किया जाता है जैसे-जमीन की नाप घेराबंदी संबंधी कार्य किया जाता है तो यह गैर कानूनी होगा। इस पर घटना दुर्घटना होने की संभावना है यदि कार्य के दौरान किसी भी प्रकार से इन पर दुर्घटना होती है तो इसकी समस्त जवाबदारी पटवारी, तहसीलदार, राजस्व निरिक्षक या ठेकेदार अनाधिकृत व्यक्ति या जो भी अधिकारी कर्मचारी इस पर संलिप्त होगा वह स्वयं जिम्मेदार होगा और शासन प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
तमनार पंचायत और कसडोल पंचायत में ग्राम सभा प्रस्ताव पारित हो चुका है कोई भी कम्पनी भू-अर्जन एवार्ड के 5 साल बाद काम नहीं कर सकता इसके अलावा किसानों की नामों को रकबा खसरा से हटा दिया गया है उसे भी पुनः यथावत किया जावे।
इसी जमीन में भारत सरकार के कोल मंत्रालय द्वारा कोल बेल्ट की नीलामी की जा रही है। जिसमें 1. गोढ़ी महलोई देवगांव 2. गोढ़ी महलोई कसडोल 3. गोढ़ी महलोई अमलीढोंढ़ा 4. गोढ़ी महलोई बिजना जोबरो है। जो कि किसान हित में नहीं है। किसान पूरा दीवालिया हो रहा है। बिना ग्राम सभा की अनुमति और इस क्षेत्र के पर्यावरण प्रदूशण की स्थिति को देखते हुए इसे रद्द कारना प्राणी हित में होगा। इन तमाम चीजों को दरकिनार कर जिंदल कम्पनी द्वारा जमीन की जबरन घेराबंदी की जा रही है। आगे निवेदन करते हुए जिलाधीश से कहा गया है कि इस पर यदि तत्काल कार्यवाही कर 3 दिवस के अंदर समाधान नहीं किया जाता है तो पीड़ित किसानों द्वारा धरना प्रदर्शन चक्का जाम व आर्थिक नाके बंदी किए जाने की बात कही गई है जिसकी समस्त जवाबदारी उद्योग प्रबंधन और शासन प्रशासन की होगी। जयशंकर प्रसाद NHRCCB BMO TAMNAR
