June 17, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

88 बहनों का भाई बने मनीष नागर

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88 बहनों का भाई बने मनीष नागर

राखी का त्योहार जिस त्योहार में हर भाई अपनी बहनों की रक्षा करने की कसमें लेता है।हर बहन की यही छह होती है कि उसकी सुरक्षा करने वाला भी एक भाई हो जो उसके सुख दुख का साथी हो।जो एक ढाल की तरह बहन को जीवन की तमाम दुख तमाम परेशानियों से बचाए रखे।लेकिन कुछ बहने ऐसी भी है जिनका कोई भाई नही है,ऐसी ही 88 बहने रहती है चक्रधर बाल सदन में।लेकिन आज रक्षाबंधन के दिन इन बहनों को 1 भाई मिल गया है।

है ये कच्चे धागों का बंधन
टूट के भी कभी नहीं टूट पायेगा
बंधेगी राखियां सुनी कलाई पर
और तिलक माथे पर सज जायेगा

रक्षाबंधन में सुनी कलाई का बोझ एक भाई के लिए जितना भारी होता है उतना ही भार उस बहन के हाथों का भी होता है जिनका कोई भाई नहीं होता।और सबसे बड़ा बोझ उन आंखों का जो देखती है यतीम हो चुकी उन बहनों को जो भाई का चेहरा भी भूल चुकी हो या जिनका कोई भाई ही न हो या हो भी तो उन्हें इस बात का पता ही नही हो।
ऐसी ही 88 बहने रहती है चक्रधर बाल सदन में।लेकिन आज रक्षाबंधन के दिन इन बहनों को मनीष नाम का भाई मिल गया है।जी हां हम रायगढ़ जिले के कोतवाली टीआई मनीष नागर की ही बात कर रहे है।बीते दिनों एक महिला की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार कर पूरे हिन्दू रीति रिवाज से उसका क्रियाकर्म कोतवाली टीआई ने किया था।उस महिला की बेटी जो चक्रधर बाल सदन में मॉ की मौत के बाद रह रही है,उसने इच्छा जाहिर की कि वह अपनी माँ का अंतिम संस्कार करने वाले अपने बड़े भाई कोतवाली टीआई को राखी बांधना चाहती।बस फिर क्या था मनीष नागर अपनी टीम के साथ बाल सदन पहुंचे और 1 नहीं बल्कि सभी 88 अनाथ बच्चियों के एकलौते भाई बने।बाल सदन की सभी बहनों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी।परम्परा अनुसार भाई मनीष ने सभी बहनों को उपहार भी दिया।सभी को आशीर्वाद देकर उनकी रक्षा करने का वादा किया।

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