मोहर्रम के सातवें दिन निकला अकीदत का जुलूस, “या हुसैन” की सदाओं से गूंजा रायगढ़
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मोहर्रम के सातवें दिन निकला अकीदत का जुलूस, “या हुसैन” की सदाओं से गूंजा रायगढ़
रायगढ़। मोहर्रम के सातवें दिन रायगढ़ शहर में अकीदत, श्रद्धा और गम का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में ईरानी मोहल्ले से भव्य जुलूस निकाला गया, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए मिठ्ठूमुड़ा दुर्गा चौक तक पहुंचा।
जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। “या हुसैन, या हुसैन” की सदाओं के बीच लोगों ने करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। मातमी धुनों और धार्मिक नारों के साथ निकले इस जुलूस ने पूरे वातावरण को गम और श्रद्धा से सराबोर कर दिया।
मोहर्रम इस्लामिक इतिहास की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जब हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ करबला के मैदान में अपने परिवार और साथियों के साथ सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत आज भी इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष का प्रतीक मानी जाती है।
जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मोहर्रम के सातवें दिन निकले इस जुलूस ने एक बार फिर करबला के संदेश—सच्चाई, इंसाफ और मानवता—को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए अमन, भाईचारे और शांति की दुआ मांगी।
