आदिवासी धर्म कोड और अधिकारों की मांग को लेकर हजारों आदिवासियों का कलेक्ट्रेट मार्च, शासन को सौंपा ज्ञापन
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आदिवासी धर्म कोड और अधिकारों की मांग को लेकर हजारों आदिवासियों का कलेक्ट्रेट मार्च, शासन को सौंपा ज्ञापन
रायगढ़। आदिवासी समन्वय समिति एवं सर्व आदिवासी समाज के संयुक्त नेतृत्व में रविवार को आदिवासी धर्म कोड, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आदिवासी अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विशाल रैली और पैदल मार्च निकाला गया। दोपहर 2 बजे अंबेडकर चौक से शुरू हुआ यह मार्च कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां शासन-प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए।
ज्ञापन में आगामी जनगणना में पृथक आदिवासी धर्म कोड लागू करने, परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व सुरक्षित रखने, स्थानीय भर्ती में जनसंख्या अनुपात के अनुसार आरक्षण और 100 बिंदु रोस्टर प्रणाली लागू करने की मांग की गई। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खनिज, वन एवं सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई।
समिति ने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा, ग्राम सभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण पर रोक, आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जों की जांच तथा विशेष भू-माफिया नियंत्रण कानून बनाने की मांग रखी। इसके अलावा पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन, लंबित वन अधिकार दावों के शीघ्र निराकरण तथा आदिवासी आस्था केंद्रों और सांस्कृतिक स्थलों को कानूनी संरक्षण देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
ज्ञापन में नक्सल मामलों में वर्षों से जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई, डीलिस्टिंग का विरोध, मातृभाषा में शिक्षा, छात्रवृत्ति संबंधी शर्तों में राहत तथा पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की मांग भी शामिल रही।
इस अवसर पर बी.एस. नागेश, सुनील मिंज, नवीन सिदार, गजेंद्र सिंह, सोमवती सिदार, अर्चना सिदार, विजय भगत, संजय उरांव, टेरेसा केरकेट्टा, सुलोचना राठिया सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आदिवासी समाज ने चेतावनी दी कि मांगों पर गंभीर पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
