ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी में भोजन में किड़ा: एक वार्डन की लापरवाही से शर्मसार हुआ नवीन जिंदल की एक सपना

ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी में भोजन में किड़ा: एक वार्डन की लापरवाही से शर्मसार हुआ एक सपना
उद्योगपति और सांसद नवीन जिंदल ने अपने पिता स्वर्गीय ओपी जिंदल जी की स्मृति में जिस उद्देश्य और संकल्प के साथ ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी की स्थापना की, वह केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं था। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्र-छात्राएं उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित और सुसज्जित आवास सुविधा भी प्राप्त करें। इसी सोच से यूनिवर्सिटी परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त हॉस्टल का निर्माण किया गया।
लेकिन हाल ही में आई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने इस समर्पण और सोच पर गहरी चोट पहुंचाई है। छात्राओं द्वारा भोजन में कीड़ा पाए जाने की शिकायत जब वार्डन तक पहुंचाई गई, तो उससे अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई। परिणामस्वरूप कई छात्राओं को फूड पॉइजनिंग का शिकार होना पड़ा। यह केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि सैकड़ों माता-पिता के विश्वास के साथ किया गया धोखा है।
जिस सपने को नवीन जिंदल जी ने अपने पिता की स्मृति में साकार किया, उसे इस तरह की घटनाएँ कलंकित करती हैं। जब यह खबर श्री जिंदल तक पहुँची होगी, तो उनके दिल में क्या गुजरी होगी, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं है। एक पुत्र जिसने अपने पिता के आदर्शों को जीवित रखने के लिए विश्वविद्यालय और हॉस्टल की नींव रखी, उसके लिए यह घटना केवल एक समाचार नहीं, बल्कि गहरे दुःख और आहत सम्मान की बात रही होगी।
यह तो सर्वविदित है कि कोई भी संस्था या संगठन अपने हर कर्मचारी पर हमेशा निगरानी नहीं रख सकता, लेकिन जब बात बच्चों की सुरक्षा की हो, तो लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। एक अकेले वार्डन की लापरवाही से पूरी यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल हुई है। यह वही कहावत चरितार्थ करता है – “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर; पंथी को छाया नहीं, फल लगे अति दूर।”
नवीन जिंदल के समर्पण और भावना पर इस तरह की घटनाएं प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं, परंतु उन्हें टूटना नहीं चाहिए। यह घटना एक चेतावनी है कि अब और सख्त प्रबंधन की आवश्यकता है। दोषियों पर कार्यवाही कर, व्यवस्था में सुधार कर, छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। तभी ओपी जिंदल जी का सपना वास्तव में सार्थक हो सकेगा।
