पयोधि की दस बाल साहित्य पुस्तकों का होगा लोकर्पण

पयोधि की दस बाल साहित्य पुस्तकों का होगा लोकर्पण
कला समय संस्कृति,शिक्षा और समाज सेवा समिति के दो दिवसीय उत्सव ‘संस्कृति-पर्व-7’ में होगा ‘बच्चों के बीच पयोधि का बाल साहित्य’
लक्ष्मी नारायण लहरे
भोपालपटनम्।प्रख्यात साहित्यकार लक्ष्मीनारायण पयोधि की 10 बाल साहित्य की पुस्तकों का लोकार्पण एक साथ दिनांक 23 सितंबर 2024 को शाम 6.30 बजे भोपाल के शहीद भवन सभागार में होगा।प्रतिष्ठित संस्था ‘कला समय संस्कृति,शिक्षा और समाज सेवा समिति’ भोपाल द्वारा मध्यप्रदेश शासन,संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय उत्सव ‘संस्कृति-पर्व-7’ के अंतर्गत इस समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान ज़िला न्यायाधीश और साहित्यकार द्वय माननीय योगेश कुमार गुप्ता और माननीय उमेश कुमार गुप्ता (भोपाल) होंगे।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद कैलाशचन्द्र घनश्याम पाण्डेय (मंदसौर) करेंगे।लोकार्पित होने वाली पुस्तकों में १.उत्तर बन जायें,२.कुक्कू के गीत,३.सूरज के उगने से पहले,४.सबका राजदुलारा भारत,५.सातवीं राजकुमारी (बालकाव्य) और ६. अजब कहानी,गज़ब कहानी,७.घोंसले का घमंड,८.मटकनी और मक्खन का गोला,९.अनुभव की सीख,१०.दान का धन (बालकथाएँ) शामिल हैं।
आयोजन के दूसरे दिन 24 सितंबर 2024 को अपरह्न 2.30 बजे उसी सभागार में ‘बच्चों के बीच पयोधि का बाल साहित्य’ होगा।विमर्श के इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ बाल साहित्यकार और बाल कल्याण एवं बाल साहित्य-शोध केन्द्र के निदेशक महेश सक्सेना करेंगे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मासिक बाल पत्रिका ‘स्नेह’ के यशस्वी संपादक कमलकांत अग्रवाल होंगे।इस कार्यक्रम में बच्चों द्वारा विमोचित पुस्तकों से अपनी-अपनी पसंद की कविताएँ और कहानियाँ प्रस्तुत की जायेंगी।कुछ बच्चे प्रस्तुत बाल साहित्य पर अपना अभिमत भी व्यक्त करेंगे।यह बाल साहित्य पर केन्द्रित एक अनूठा आयोजन होगा।उल्लेखनीय है कि मूलतः बीजापुर ज़िले के भोपालपटनम् निवासी लक्ष्मीनारायण पयोधि मध्यप्रदेश शासन,आदिम जाति कल्याण विभाग के वन्या प्रकाशन की प्रसिद्ध मासिक पत्रिका ‘समझ झरोखा’ के लंबे समय तक संपादक रहे हैं और उनके संपादनकाल में बाल पत्रिका ‘समझ झरोखा’ बच्चों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही है।यह भी एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है कि बहुविध साहित्य-सर्जक श्री पयोधि की विभिन्न विधाओं में 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं।उनके साहित्य पर चार विभिन्न अध्येताओं की चार विवेचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित हैं और दो शोधार्थियों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों से पीएचडी की उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।

