आरक्षण के फैसले के विरोध में आदिवासी समुदाय ने आज भारत बंद, का आव्हान किया . आदिवासी संगठनों ने आज अपनी मांगों को लेकर भारत बंद शांतिपूर्ण रैली निकाल कर ज्ञापन दिया

आरक्षण के फैसले के विरोध में आदिवासी समुदाय ने आज भारत बंद, का आव्हान किया . आदिवासी संगठनों ने आज अपनी मांगों को लेकर भारत बंद शांतिपूर्ण रैली निकाल कर ज्ञापन दिया
पत्थलगांव पत्थलगांव क्षेत्र से हजारों की संख्या में सेंट जेवियर्स चौक में आदिवासी समुदाय के एकत्रित होकर रैली निकाली अंबिकापुर रोड होते हुए इंदिरा चौक पहुंची और लोगों से अपनी प्रतिष्ठान को बंद करने की अपील की गई जहां इंदिरा चौक पर संबोधन किया गया तत्पश्चात रेस्ट हाउस पर एसडीम महोदया को ज्ञापन सोपा गया । .आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षण का मुद्दा को मजबूत प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की मांग को लेकर आज बुधवार को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है. इस बंद को लेकर दलित और आदिवासी संगठनों के राष्ट्रीय परिसंघ (एनएसीडीएओआर) ने मांगों की एक लिस्ट भी जारी की है, जिसमें अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए न्याय और समानता शामिल हैं. एनएसीडीएओआर ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ इस बंद को बुलाया है, जो उनके अनुसार, ऐतिहासिक इंदिरा साहनी मामले में नौ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए पहले के फैसले को कमजोर करता है, जिसने भारत में आरक्षण के लिए रूपरेखा स्थापित की थी. एनएसीडीएओआर ने सरकार से इस फैसले को खारिज करने का आग्रह किया है, उनका तर्क है कि इससे अनुसूचित जातियों और जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों को खतरा पैदा होगा.
संगठन अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण पर संसद द्वारा एक नया अधिनियम पारित करने की भी मांग कर रहा है, जिसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करके संरक्षित किया जाएगा. संगठन का तर्क है कि इससे इन प्रावधानों को न्यायिक हस्तक्षेप से बचाया जा सकेगा और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा. सरकारी सेवाओं में SC/ST/OBC कर्मचारियों के जाति-आधारित डेटा को तत्काल जारी करने की भी मांग की है ताकि उनका सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके.
वे समाज के सभी वर्गों से न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों की भर्ती के लिए भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना पर भी जोर दे रहे हैं, जिसका लक्ष्य उच्च न्यायपालिका में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों से 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्राप्त करना है.
इस संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सभी बैकलॉग रिक्तियों को भरने का आह्वान किया है. निकाय ने कहा कि सरकारी प्रोत्साहनों या निवेशों से लाभ उठाने वाली निजी क्षेत्र की कंपनियों को अपनी फर्मों में सकारात्मक कार्रवाई की नीतियां लागू करनी चाहिए. दलितों, आदिवासियों और आदिवासी प्रतिनिधित्व करते वाले नेहरू लकड़ा आनंद नाग फादर याकूब स्मृति अमित खलखो अमिताभ कुजूर नारायण सिदार मनोज सिदार फादर याकूब जोसेफ कुजूर सुमन कूजूर पर्षद सुंदर लकडा राजनी तिग्गा रुप सिह राठिया जोर साय एक्का सत्या मिर्रे साधराम मिंज तिवारी एक्का सिलमोन एक्का चमर साय बुधवार को शांतिपूर्ण रैली में भाग लेकर अपना योगदान दिया
इस दौरान एडिशनल अनिल सोनी एसडीओपी धुर्वेश जायसवाल थाना प्रभारी विनीत पांडे समेत भारी संख्या में पुलिस प्रशासनिक अमला मुस्तादी के साथ तैनात दिखी



