July 10, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

गैर जिम्मेदार और भ्रष्ट अधिकारियों का स्थानीय बेरोजगारों के हक पर डाका

1 min read
Spread the love

गैर जिम्मेदार और भ्रष्ट अधिकारियों का स्थानीय बेरोजगारों के हक पर डाका

जशपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक यू. डी. मिंज ने आत्मानंद भर्ती में ‘अनियमितता करने वाले अधिकारियों को सस्पेंड करने माँग की

कुनकुरी।

जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में संविदा भर्ती प्रक्रिया अब ‘रोजगार’ के बजाय ‘विवाद और उगाही’ का अखाड़ा बन चुकी है। 8 महीने से लटकी इस भर्ती में फाइलों की छीना-झपटी, नियमों में रातों-रात बदलाव और साक्षात्कार (Interview) में भारी धांधली के आरोपों ने प्रशासनिक सुशासन की धज्जियां उड़ा दी हैं। पूर्व विधायक यू.डी. मिंज ने सीधा हमला बोलते हुए इसे “अधिकारियों का संगठित भ्रष्टाचार” करार दिया है।
पूर्व विधायक यू.डी. मिंज का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को जानबूझकर कछुआ चाल से चलाया गया। जब जिला पंचायत सीईओ के पास प्रभार आने से काम में तेजी आई, तो एक ‘खास’ डिप्टी कलेक्टर ने स्वयंभू तरीके से फाइल फिर से अपने कब्जे में ले ली और मनमानी काम करके भ्रष्टाचार को अंजाम देने में लगे है.
उन्होंने कहा कि”आखिर किस मंशा से फाइल ली गई? क्या इंटरव्यू से ठीक पहले किसी बड़े आर्थिक लेन-देन की सेटिंग को अंजाम देने के लिए यह दखलअंदाजी हुई है?”

योग्य को बाहर, चहेतों को अंदर,,?
भर्ती में सबसे बड़ा विवाद ‘स्किल टेस्ट’ को लेकर है। विज्ञापन में शिक्षकों के लिए किसी कौशल परीक्षा का उल्लेख नहीं था, लेकिन अचानक इसे थोप दिया गया। आरोप है कि यह नियम केवल इसलिए जोड़ा गया ताकि मेरिट में आने वाले योग्य युवाओं को स्किल टेस्ट के बहाने बाहर किया जा सके और ‘सेटिंग’ वाले उम्मीदवारों को पिछले दरवाजे से एंट्री दी जा सके।
उन्होंने कहा कि 50% वेटेज ने खत्म की मेरिट जशपुर जिला प्रदेश का संभवतः ऐसा पहला जिला बन गया है जहाँ साक्षात्कार को 40-50% तक वजन दिया गया। अगर कोई अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में टॉप पर है, तो भी इंटरव्यू पैनल उसे कम अंक देकर फेल कर सकता है।और ऐसा किया गया है
उन्होंने बताया कि यह साफ तौर पर पक्षपात की ओर इशारा करता है। इसमें नियम बदलने का अधिकार किसी को नहीं है.
उन्होंने में संविधान के अनुच्छेद 162, 166 और 309 का हवाला देते हुए कहा गया है कि भर्ती नियम बदलने का अधिकार केवल राज्य सरकार को है। कलेक्टर द्वारा अपने स्तर पर चयन प्रक्रिया में संशोधन करना ‘Ultra Vires’ (अधिकार क्षेत्र से बाहर) और असंवैधानिक है।
अंग्रेजी माध्यम की भर्ती के लिए इंटरव्यू पैनल में हिंदी और संस्कृत माध्यम के शिक्षकों को रखना प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।पूर्व के वर्षो में की गई भर्ती में कौशल परीक्षा नॉन टीचिंग पोस्ट के लिए किया गया है जबकि 2025-26 की भर्ती में ऐसा नहीं किया गया है चयनसमिति को पढ़े लिखे गँवार अधिकारियों को अध्ययन करना चाहिए, उन्होंने बताया कि पहले इंटरव्यू के तुरंत बाद अभ्यर्थियों को आर्डर उसी दिन दे दिया जाता अभी काबिल अधिकारी लोग देने में 15 दिन लगा दे रहे है आखिर ऐसा खेल कलेक्टर के जिला प्रशासन के नाक के नीचे कैसे हो रहा बेरोजगारों की भावनाओं से प्रशासन आखिर कौन सा खेल खेल रहे है वह भी तब जब अधिकारी के ऊपर अधिकारियों को बैठाया गया है इसका सीधा सा मतलब है कि जिला प्रशासन के शह पर बेरोजगारों के साथ छल हो रहा है.
उन्होंने माँग कि है कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए। दोषी और जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और राज्य स्तर पर एक समान नियमावली लागू हो।
उन्होंने कहा कि एक तरफ अधिकारी ‘लेन-देन’ और फाइलों के खेल में उलझे हैं, दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने को हैं और छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। यदि पारदर्शिता के साथ भर्ती नहीं हुई, तो कांग्रेस ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.