मृतक आरक्षक राहुल कुजूर की मां का पुलिस पर टूटा भरोसा, बेटे को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई जांच की कर रही है तैयारी
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मृतक आरक्षक राहुल कुजूर की मां का पुलिस पर टूटा भरोसा, बेटे को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई जांच की कर रही है तैयारी
रायगढ़ – रायगढ़ जिले में एक मां का दिल टूट चुका है। वह अपने बेटे की हत्या के बाद न्याय की तलाश में थाना, पुलिस अधीक्षक के कार्यालय और विभिन्न अधिकारियों के पास चक्कर लगा रही है, लेकिन उसे सिर्फ आश्वासन और सांत्वना मिल रही है। तीन महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी तक उसके बेटे की हत्या का रहस्य उजागर नहीं हो पाया है, न ही किसी भी आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। मृतक आरक्षक राहुल कुजूर की मां, संतोषी कुजूर, अब न्याय की उम्मीद छोड़ चुकी हैं और सीबीआई जांच की मांग करने की तैयारी कर रही हैं। यह एक मां के दिल की पुकार है, जो अपने बेटे के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रही है।
आरक्षक राहुल कुजूर की मौत 30/4/2024 के अप्रैल माह में हुई थी। उसे दुर्घटना का शिकार बताया गया था, लेकिन जब संतोषी कुजूर ने अपने बेटे की मृत्यु के तथ्यों की जांच की तो बहुत सी असंगतियां सामने आईं। मृतक के साथियों ने दुर्घटना की बात कही, लेकिन जांच के दौरान ऐसी कई बातें सामने आईं, जो इस पूरी घटना को संदेहास्पद बनाती हैं।
संतोषी कुजूर ने बताया कि जिस जगह पर राहुल की दुर्घटना हुई बताई जा रही है, वहां पर उसकी मोटरसाइकिल में खरोंच तक नहीं थी। दुर्घटना स्थल पर न तो खून की कोई बूंद गिरी थी और न ही कोई स्पष्ट निशान मिले थे, जो दुर्घटना को प्रमाणित करते। इसके विपरीत, जब राहुल को अस्पताल लाया गया तो उसके शरीर पर खून से सनी लहूलुहान बिस्तर और मुंह से खून निकलता हुआ पाया गया। यह सब घटनाएं उसके बेटे की मौत को महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि साजिश का हिस्सा बनाती हैं।
संतोषी कुजूर ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे जानबूझकर उसके बेटे के हत्यारे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस जांच में लापरवाही बरत रही है और उसे केवल सांत्वना देने तक सीमित है। मृतक के अस्पताल के दस्तावेज में एक महत्वपूर्ण गड़बड़ी सामने आई, जिसमें यह उल्लेख था कि जिस एंबुलेंस से राहुल को अस्पताल लाया गया था, उसका नंबर रिकॉर्ड में नहीं था। यह एक और संदेह पैदा करता है कि कहीं कुछ छिपाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।
अंततः संतोषी कुजूर ने पुलिस अधीक्षक रायगढ़ से 3 महीने पहले एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उसने अपने बेटे की हत्या के मामले की गहरी जांच की मांग की थी, लेकिन अब तक उसे इस मामले में कोई भी ठोस जानकारी नहीं मिली है। पुलिस अधीक्षक रायगढ़ ने न तो उसे फोन किया, न ही किसी तरह की अपडेट दी। इससे संतोषी कुजूर का पुलिस पर से भरोसा टूट गया है और वह अब उच्च अधिकारियों के पास शिकायत करने की योजना बना रही हैं। वह अब सीबीआई जांच की मांग कर रही हैं, ताकि उनके बेटे के हत्यारे को सजा मिल सके।
संतोषी कुजूर ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि उसके बेटे के दोस्तों ने उसे यह बताया कि राहुल की मृत्यु एक दुर्घटना थी। लेकिन जो परिस्थितियां सामने आईं, उनमें कोई भी दुर्घटना का संकेत नहीं मिलता। संतोषी कुजूर को शक है कि उसके बेटे की हत्या उसके दोस्तों ने मिलकर की हो सकती है। उसने विशेष रूप से तीन लोगों का नाम लिया है — अतीश, बिलसन और प्रतिक, और एक महिला का नाम भी लिया है, जो इस मामले में संदिग्ध प्रतीत होते हैं।
संतोषी कुजूर का मानना है कि अगर पुलिस इन लोगों से पूछताछ करती तो शायद मृतक के हत्यारे का पता चल जाता और हत्या में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते थे। संतोषी कुजूर ने यह भी कहा कि पुलिस की निष्क्रियता और जांच में ढिलाई से हत्यारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
मां के लिए अपने बेटे की मृत्यु का रहस्य सुलझाना और उसे न्याय दिलाना एक कठिन संघर्ष बन चुका है। संतोषी कुजूर का कहना है कि जब तक उसके बेटे के हत्यारे का पता नहीं चलता, वह चुप नहीं बैठेगी। अब वह अपनी आवाज को और ऊंचा करने का संकल्प ले चुकी है। उसने यह भी कहा है कि वह इस साल क्रिसमस का त्यौहार नहीं मनाएगी, क्योंकि उसके बेटे के बिना यह खुशी अधूरी है। राहुल के साथ पूरे परिवार ने मिलकर हर साल धूमधाम से क्रिसमस मनाया था, लेकिन अब उस खुशी को मनाने का कोई मतलब नहीं है।
संतोषी कुजूर का दिल टूट चुका है, लेकिन उसकी उम्मीदें अभी भी जीवित हैं। वह अपनी आवाज को उठाने के लिए तैयार है, और अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। वह अब पुलिस के बजाय उच्च अधिकारियों से उम्मीद कर रही हैं कि वे इस मामले की गहरी जांच कराएं और दोषियों को सजा दिलवाएं।
यह घटना एक मां की करुण पुकार है, जो न्याय की उम्मीद में दर-दर की ठोकरें खा रही है। यह घटना समाज में उन लाखों पीड़ितों के लिए एक चेतावनी है, जो न्याय पाने के लिए पुलिस और प्रशासन के सामने सिर झुका चुके हैं। संतोषी कुजूर जैसे मां के संघर्ष से यह स्पष्ट होता है कि कभी-कभी न्याय के लिए हमें खुद ही आवाज उठानी पड़ती है।
मृतक आरक्षक राहुल कुजूर के मामले में अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं, और संतोषी कुजूर की यह उम्मीद है कि उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेकर उसकी पीड़ा को समझेंगे और उसे न्याय दिलवाएंगे।
