स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से देवगढ़ मार्ग का भविष्य खतरे में
1 min readस्थानीय प्रशासन की लापरवाही से देवगढ़ मार्ग का भविष्य खतरे में
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में स्थित तमनार से रायगढ़ मुख्य मार्ग पर बने केशलापाठ (पाझर) पुलिया का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद से स्थानीय प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। CSPGCL के अदानी माइंस से रात में सैकड़ों भारी वाहनों का आवागमन तमनार से देवगढ़ होते हुए घरघोड़ा साइडिंग पर कोयला ले जाने के लिए किया जा रहा है। इस स्थिति से एकल सड़कों पर भारी वाहनों के चलने से समस्या बढ़ रही है, जिससे स्थानीय निवासियों के लिए जान-माल का खतरा उत्पन्न हो रहा है।
कम क्षमता वाली इस सिंगल सड़क पर भारी ट्रक, टेलर, हाइवा और डंपर धड़ल्ले से चल रहे हैं। राम मंदिर चौक (तमनार) से बासनपाली, जरेकेला, देवगढ़, झरियापाली और नावापारा चौक (घरघोड़ा) होते हुए भारी वाहन चलाए जा रहे हैं। इस स्थिति के कारण अक्सर मार्ग में जाम की स्थिति बन रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। यदि यह क्रम जारी रहा, तो यह सड़क और पुल जल्द ही जर्जर हो जाएंगे।
पूर्व में हुई दुर्घटनाएं
इससे पहले भी इस मार्ग पर भारी वाहनों के चलने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। मिलूपारा से पूंजीपथरा तक मुख्य सड़क के निर्माण के दौरान भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें कच्चे मकान में भारी वाहन घुस जाने से जानें गई थीं। यह घटनाएं प्रशासन की अनदेखी को दर्शाती हैं।
प्रशासन का मौन
स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही इस संकट को और बढ़ा रही है। यह स्पष्ट है कि वे किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस स्थिति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, और न ही किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने का साहस दिखाया जा रहा है।
क्षेत्रवासियों का संघर्ष
तमनार क्षेत्र के निवासियों ने पिछले 20-25 वर्षों में सड़क के सुधार के लिए संघर्ष किया है, और यह सड़क कुछ महीने पहले तक उनकी एकमात्र चलने लायक सड़क थी। अब, स्थानीय जनता एक बार फिर से सड़क सुरक्षा के लिए आंदोलन करने के लिए तैयार हो रही है।
समाधान की आवश्यकता
जिला प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस सड़क पर भारी वाहनों के आवागमन को प्रतिबंधित करे। इसके अलावा, स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय किए जाएं। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस क्षेत्र में सड़क और पुल की स्थिति को गंभीरता से ले और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से पहले ही निवारक कदम उठाए।
इस स्थिति को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि शासन-प्रशासन केवल कोल और ट्रांसपोर्टर कंपनियों के मोहरे बनकर रह गए हैं। तमनार क्षेत्रवासियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

