April 16, 2026

dainik

RAIGARH ANCHAL

कविता बसंत उतरगे मोर अंगना म ……………..महर – महर महकत हेसुरूर -सुरूर हवा बहत हेअमरैया म कोयल कुहकत हेमीठ – मीठ बोली बोलत हेपरछर हे मोर घर -अंगना हलईका मन के किलकारी ले गुंजत हेटरटर ल घाम उतरगे मोर अंगना मबसंत रितु आगे संदेस लेकेखेत -खार म फुलगे सरसोंघमघम लसुग्घर लागत हे अमरैया हमहर -महर महकत हेभंवरा मन झूमत हेमोर अंगना म सुमत आगेबर -विवाह के लगन धारागेखुसी के रंग मन म छागेबसंत उतरगे मोर अंगना म …नावा संदेस लेके सुरुज ह आगेअमरैया म कोयल ह आगेमीठ बोली बोलत हेमन ल हरसावत हेबसंत उतरगे मोर अंगना मलक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”वरिष्ठ साहित्यकार पत्रकारगांव कोसीरजिला -सारंगढ़ बिलाईगढ़छत्तीसगढ़Shahil.goldy@gmail.com

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कविता
बसंत उतरगे मोर अंगना म …
…………..
महर – महर महकत हे
सुरूर -सुरूर हवा बहत हे
अमरैया म कोयल कुहकत हे
मीठ – मीठ बोली बोलत हे
परछर हे मोर घर -अंगना ह
लईका मन के किलकारी ले गुंजत हे
टरटर ल घाम उतरगे मोर अंगना म
बसंत रितु आगे संदेस लेके
खेत -खार म फुलगे सरसों
घमघम ल
सुग्घर लागत हे अमरैया ह
महर -महर महकत हे
भंवरा मन झूमत हे
मोर अंगना म सुमत आगे
बर -विवाह के लगन धारागे
खुसी के रंग मन म छागे
बसंत उतरगे मोर अंगना म …
नावा संदेस लेके सुरुज ह आगे
अमरैया म कोयल ह आगे
मीठ बोली बोलत हे
मन ल हरसावत हे
बसंत उतरगे मोर अंगना म
लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”
वरिष्ठ साहित्यकार पत्रकार
गांव कोसीर
जिला -सारंगढ़ बिलाईगढ़
छत्तीसगढ़
Shahil.goldy@gmail.com

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