शासकीय कर्मचारी की लापरवाही से पीड़ित श्रमिक की आंख में लगी चोट, मुआवजा की मांग पर धमकी
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शासकीय कर्मचारी की लापरवाही से पीड़ित श्रमिक की आंख में लगी चोट, मुआवजा की मांग पर धमकी
रायगढ़ – रायगढ़ में नगर पालिक निगम के भवन अधिकारी अमरेश लोहिया और उनके अधीन कार्यरत शासकीय कर्मचारी राजकुमार सिदार के द्वारा एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। 15 जनवरी 2025 को जारी किए गए एक नोटिस में राजकुमार सिदार को एक भवन निर्माण कार्य को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया था। यह निर्माण बिना वैध दस्तावेजों के किया जा रहा था और समय पर आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, आदेश के बावजूद, न तो निर्माण कार्य रोका गया, न ही संबंधित दस्तावेज नगर निगम में प्रस्तुत किए गए।
इस लापरवाही का परिणाम 1 फरवरी 2025 को सामने आया, जब निर्माण स्थल पर काम कर रहे श्रमिक रामदयाल यादव की आंख में चोट लग गई। रामदयाल यादव, जो 62 वर्ष के एक राज मिस्त्री हैं, ने अपनी आंख का इलाज कराने के लिए मुआवजा की मांग की, क्योंकि वह अपनी चोट के इलाज के लिए लगभग 70,000 रुपये के खर्च का सामना कर रहे थे।
रामदयाल ने जब शासकीय कर्मचारी राजकुमार सिदार से मुआवजा की मांग की, तो उसे न केवल मुआवजा देने से इंकार किया गया, बल्कि धमकी भी दी गई। राजकुमार सिदार के इस व्यवहार ने पीड़ित श्रमिक को शोषण और डर का सामना करवा दिया। रामदयाल यादव ने अपनी शिकायत 5 फरवरी 2025 को सहायक श्रमाआयुक्त घनश्याम पाणिग्रही के समक्ष पेश की, जिसमें उन्होंने अपनी आंख के इलाज के लिए मुआवजे की मांग की।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इस पीड़ित श्रमिक को समय रहते मुआवजा मिलेगा ताकि वह अपनी आंख का इलाज करवा सके? अगर उसे मुआवजा नहीं मिलता और उसकी आंख की स्थिति बिगड़ जाती है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी कोई लेगा? इस लापरवाही का परिणाम उस श्रमिक के जीवन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है, और अगर उसकी आंख की रोशनी चली जाती है, तो यह पूरा घटनाक्रम न केवल एक शासकीय कर्मचारी की जिम्मेदारी की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता को भी सामने लाता है।
पीड़ित श्रमिक की आंख का इलाज हो या न हो, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएं। अगर जिम्मेदार अधिकारी समय पर कार्यवाही करते तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी। अब, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस मामले में त्वरित और प्रभावी कदम उठाता है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके, या फिर उसे मुआवजा के बिना ही अपनी आंख से हमेशा के लिए हाथ धोना पड़े।
यह मामला नगर पालिक निगम रायगढ़ की कार्यप्रणाली और उसके कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। क्या प्रशासन अपनी लापरवाही को स्वीकार करेगा, या फिर पीड़ित श्रमिक को न्याय दिलाने में कोई कार्रवाई करेगा?
