अन्नपूर्णा’ बीज भन्डार पत्थलगांव में किसान के साथ हो रहा धोखा .कृषि विभाग मौन
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अन्नपूर्णा’ बीज भन्डार पत्थलगांव में किसान के साथ हो रहा धोखा .कृषि विभाग मौन
पत्थलगांव छत्तीसगढ़ के भाजपा सरकार किसान के हितेषी बताते हुए नहीं थक रहे है एक तरफ सरकार कह रही है पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है ।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी का गृह ज़िला होने के बावजूद किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है इन दिनों विकास की ऐसी ‘गंगा बह रहा है जिसका सीधे फायदा उर्वरक’ बिक्रेता पत्थलगांव के खाद व्यापारी को हो रहा है जो खुशी से फूले नहीं समा रहे! खाद की कालाबाजारी को लेकर पत्थलगांव में यह दूसरा बड़ा कारनमा हुआ है। ऐसा लगता है कि सरकार बदलने के बाद सबसे ज़्यादा ‘विकास’ पत्थलगांव के खाद-बीज विक्रेताओं की हूई है और पत्थलगांव कृषि विभाग के अधिकारियों की कर्तव्य निष्ठा ओर ईमानदारी पर कोई सक नही ! किसान खाद बीज दवाई के लिए कई बार कृषि अफिस का चक्कर लगाने पर भी समस्या का कोई समाधान नहीं या तो अधिकारी नदारत पाए जाते हैं .अन्नपूर्णा खाद भंडार – दुकान में बैठकर मुस्कुराते हुए व्यापारी महोदय का अंदाज़ किसी अंतरराष्ट्रीय बिजनेस गुरु से कम नहीं है। कैमरे में साफ रिकॉर्ड हो रहा है किसानो.को जितने में बेकूफ़ बना ली जाए, उतना वसूल लो”!
- MRP का नया फॉर्मूला: ₹266.50 का माल ₹350 बताकर बेचो या ₹550 ऐंठ लो। व्यापारी का गणित इतना मजबूत है कि अल्बर्ट आइंस्टीन भी कब्र में बैठकर नोट्स बना रहे होंगे!
- डिजिटल इंडिया का असली उपयोग: झकड़पुर के नंदू जैसे गरीब किसान आते हैं, ऑनलाइन पेमेंट (PayTM/PhonePe) भी करते हैं, लेकिन पक्की रसीद मांगने पर व्यापारी को अचानक ‘भूलने की बीमारी’ हो जाती है।
- अंगूठा सरकार का, जेब व्यापारी की: पॉस (POS) मशीन पर किसान का अंगूठा तो लग जाता है, पर खाद की बोरी के साथ किसान का पूरा बजट ही स्वाहा हो जाता है। कृषि विभाग के अधिकारी इतने ‘ईमानदार’ और ‘वफादार’ हो चुके हैं कि उनके नाक नीचे खाद दुकानों पर सब कुछ चल रहा लेकिन उन्हें .नज़र नहीं आता है। ऐसा लगता है कि अधिकारियों को किसान नहीं, बल्कि व्यापारियों से विशेष प्रेम है! मुख्यमंत्री के अपने गृह ज़िले में उड़नदस्ते शायद इतने उड़ चुके हैं कि ज़मीन पर क्या लूट मच रही है, यह देखने की फुर्सत किसी को नहीं है।
